Chandigarh News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जजों की कमी को दूर करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कॉलेजियम ने हाई कोर्ट के दो अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की मजबूत सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है।
शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा इस अनुशंसा को हरी झंडी दिए जाने के बाद अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार के पाले में है। मोदी सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही दोनों अतिरिक्त न्यायाधीशों की स्थायी पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।
इस महत्वपूर्ण सूची में जस्टिस एच एस ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा का नाम शामिल है। इन दोनों कानूनविदों को पिछले साल फरवरी महीने में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त किया गया था। अब इनके बेहतर कार्य को देखते हुए प्रमोट किया जा रहा है।
हाई कोर्ट में स्वीकृत पदों का पूरा गणित
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जजों के कार्यभार को संभालने के लिए कुल 85 पद स्वीकृत किए गए हैं। इन स्वीकृत पदों में से 64 पद स्थायी न्यायाधीशों के लिए निर्धारित हैं। इसके अलावा बाकी बचे 21 पद अस्थायी यानी अतिरिक्त न्यायाधीशों के लिए रखे गए हैं।
अगर वर्तमान स्थिति की बात करें तो इस समय हाई कोर्ट में केवल 56 जज ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 40 स्थायी न्यायाधीश और 16 अस्थायी न्यायाधीश शामिल हैं। अदालतों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए इन रिक्त पदों को भरना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
न्यायपालिका में खाली पदों को कम करने और उच्च न्यायालयों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम समय-समय पर अतिरिक्त न्यायाधीशों के कार्यों की गहन समीक्षा करता है। इस प्रक्रिया में उनके दिए गए फैसलों की गुणवत्ता और केस निपटाने की दर का मूल्यांकन होता है।
स्थायी न्यायाधीश बनने के क्या हैं फायदे?
आमतौर पर अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति एक बेहद सीमित अवधि के लिए ही की जाती है। इसके बाद उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड और कार्य निष्पादन की बारीकी से जांच होती है। इसी सकारात्मक समीक्षा के आधार पर ही उन्हें बाद में स्थायी न्यायाधीश के रूप में प्रमोट किया जाता है।
स्थायी न्यायाधीश का दर्जा मिलने के बाद संबंधित जजों को एक नियमित संवैधानिक पद प्राप्त हो जाता है। इसके बाद वे बिना किसी सेवा विस्तार के सीधे अपनी सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु तक पद पर बने रह सकते हैं। इससे उनके न्यायिक फैसलों में और अधिक निरंतरता आती है।
हाई कोर्ट की न्यायिक क्षमता और कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में कॉलेजियम ने हाल ही में 10 वरिष्ठ वकीलों को भी न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी, ताकि जनता को समय पर न्याय मिल सके।
Author: Jatin Sharma


