West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है। पहली बार विधायक बने रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक बागी गुट ने खुद को असली टीएमसी घोषित कर दिया है। इसके बाद राज्य की राजनीति में अचानक भारी गरमाहट आ गई है।
विधानसभा स्पीकर ने बड़ा फैसला लेते हुए बागी विधायक रितब्रता बनर्जी को आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष मान लिया है। बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें पार्टी के 60 विधायकों का खुला समर्थन प्राप्त है। टीएमसी से निष्कासित नेता संदीपन साहा ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष का कमरा भी अलॉट हो गया है।
विधायकों के जाली हस्ताक्षर वाले पत्र से भड़का असली विवाद
इस पूरे राजनीतिक संकट की शुरुआत एक गंभीर आरोप के साथ हुई थी। बागी गुट का आरोप है कि पार्टी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले पत्र पर विधायकों के जाली दस्तखत किए। विधायक संदीपन साहा और रितब्रता बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
इस शिकायत के तुरंत बाद ही टीएमसी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासन के बाद रितब्रता ने बगावत तेज कर दी। बंगाल में लगातार तीन बार पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने वाली ममता बनर्जी के लिए यह बेहद अप्रत्याशित झटका है।
ममता बनर्जी की महत्वपूर्ण बैठकों से गायब रहे 60 विधायक
टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 60 विधायक पिछले सप्ताह ममता बनर्जी के आवास पर हुई अहम बैठक में नहीं पहुंचे। इसके बाद कोलकाता में आयोजित हुए पहले जन प्रदर्शन में भी ममता बनर्जी के साथ केवल 8 विधायक और 6 सांसद दिखे। इस कम उपस्थिति ने बागी गुट के दावों को और मजबूत कर दिया है।
बागी खेमे ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के सामने 60 विधायकों के हस्ताक्षर वाली एक नई चिट्ठी पेश कर दी। हालांकि इस समूह ने रणनीतिक रूप से ममता बनर्जी को ही अपना सर्वोच्च नेता माना है। बागी विधायकों का कहना है कि वे टीएमसी के झंडे तले ही काम जारी रखेंगे।
Author: Sourav Banerjee


