International News: अमेरिका में रक्षा और सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने कैलिफोर्निया से एक बड़ी टेक कंपनी के सीईओ को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ईरान की सेना और उसके परमाणु संस्थानों को बेहद संवेदनशील कंप्यूटर नेटवर्किंग उपकरण भेजने का गंभीर आरोप है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी चार्जशीट में बड़ा दावा किया है। आरोपी ने वाशिंगटन के कड़े प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाकर सालों तक ईरान को खुफिया तकनीक सप्लाई की। इस अवैध कारोबार से उसने करोड़ों डॉलर कमाए। इस तकनीक ने अमेरिकी हितों के खिलाफ सैन्य ताकत बढ़ाने में ईरान की मदद की।
दोहरी नागरिकता की आड़ में चल रहा था पूरा नेटवर्क
कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट कोस्ट में रहने वाले इस 63 वर्षीय आरोपी का नाम जमशेद घोमी है। घोमी के पास अमेरिका और ईरान दोनों देशों की नागरिकता है। वह तेहरान की बड़ी नेटवर्किंग कंपनी फराज परदाज रायनेह का मालिक है। उस पर 2011 से 2024 तक अवैध उपकरण भेजने का आरोप है।
अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक घोमी का यह खुफिया नेटवर्क पिछले 13 सालों से लगातार सक्रिय था। इस दौरान उसने सैकड़ों टन प्रतिबंधित संचार उपकरण ईरान पहुंचाए। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस अवैध धंधे से कमाए गए करीब 125 करोड़ रुपये अमेरिकी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
यूएई के रास्ते होती थी संवेदनशील सामानों की तस्करी
पकड़े जाने से बचने के लिए घोमी सीधे तेहरान सामान नहीं भेजता था। वह संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद बिचौलियों और मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करता था। इस शातिर चाल का मकसद अमेरिकी सप्लायर्स से असली डेस्टिनेशन को छिपाना था, ताकि किसी को जरा भी शक न हो।
अमरीकी प्रतिबंधों के तहत बिना सरकारी मंजूरी के ईरान के साथ रक्षा सौदे करना पूरी तरह गैरकानूनी है। जांच में सामने आया कि घोमी ने उपकरणों की खरीद के लिए अपने ईबे और पेपैल खातों का भी इस्तेमाल किया था। वह अब तक 250 टन से अधिक नेटवर्किंग सामान भेज चुका था।
ईरान के शीर्ष परमाणु ऊर्जा संगठन से जुड़े थे तार
इस पूरे मामले का सबसे खतरनाक पहलू ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ा है। अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि घोमी ने ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन को अमेरिकी उपकरण दिए। यह वही सरकारी संस्था है जो ईरान के पूरे यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम की देखरेख करती है।
अधिकारियों को जांच के दौरान 2017 का एक अहम कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस खुफिया दस्तावेज में अमेरिकी उपकरणों का अंतिम उपयोगकर्ता सीधे ईरान के रक्षा मंत्रालय को बताया गया था। अमेरिकी कानून के मुताबिक यदि घोमी अदालत में दोषी साबित होता है, तो उसे 20 साल की जेल होगी।
Author: Pallavi Sharma


