Ladakh News: भारत-चीन सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चुमुर गांव जल्द ही पूरी तरह बदलने जा रहा है। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत यहां पहले मॉडल बॉर्डर विलेज की नींव रख दी है। यह कदम देश की सीमाओं को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगा।
चार मजबूत स्तंभों पर खड़ा होगा नया चुमुर गांव
प्रशासन इस सीमावर्ती क्षेत्र के समग्र विकास के लिए चार प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर काम कर रहा है। इसके तहत बुनियादी ढांचे का आधुनिकरण, रोजगार के नए अवसरों का सृजन और नागरिक-सुरक्षा बल समन्वय को मजबूत किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देकर दुर्गम इलाकों से होने वाले पलायन को हमेशा के लिए रोकना है।
अत्यधिक ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को जल्द ही पैसिव सोलर तकनीक से निर्मित विशेष आवास मिलेंगे। ये आधुनिक घर शून्य से 35 डिग्री नीचे वाले भीषण तापमान में भी ग्रामीणों को सुरक्षित और गर्म रखेंगे। प्रशासन सितंबर 2026 तक सभी चिन्हित परिवारों के लिए इन सभी सुविधायुक्त घरों का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा।
पश्मीना और पर्यटन से बढ़ेगी सीमावर्ती ग्रामीणों की आय
चुमुर को अब कोरजोक-हनले पर्यटन सर्किट के एक प्रमुख और आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए गांव में सामुदायिक कैफे, आधुनिक होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए नए बाजार बनेंगे। इस अनूठी पहल से जहां पर्यटन बढ़ेगा, वहीं विश्व प्रसिद्ध स्थानीय पश्मीना उद्योग को भी नया वैश्विक मंच मिलेगा।
खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए यहां एक विशाल और आधुनिक व्यावसायिक ग्रीनहाउस स्थापित किया जा रहा है। विख्यात रक्षा संस्थान ‘डीआईएचएआर’ के तकनीकी सहयोग से बनने वाले इस प्लांट में सालभर ताजी सब्जियों का उत्पादन होगा। यह सब्जियां स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ वहां तैनात भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों को भी भेजी जाएंगी।
शहरी सुविधाओं से लैस होगा ऑल वेदर केंद्रीय सेवा केंद्र
कठिन सर्दियों से निपटने के लिए चुमुर में सौर ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी हर मौसम में चलने वाली सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा गांव में एक केंद्रीय सेवा केंद्र भी बनेगा, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आधुनिक स्कूल और टूरिस्ट इंटरप्रिटेशन सेंटर शामिल होंगे। यह मॉडल भविष्य में अन्य हिमालयी सीमा क्षेत्रों के लिए एक मिसाल बनेगा।
Author: Rigzin Namgyal


