Delhi News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स आठवें वेतन आयोग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नया वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी और पेंशन में भारी बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है। इसके लिए इस बार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.5 गुना करने की लगातार मांग उठ रही है।
केंद्रीय बजट और सरकारी खजाने पर पड़ेगा सीधा असर
सरकारी कर्मचारियों का वेतन हमेशा सरकार के राजस्व खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है। सातवें वेतन आयोग ने कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में 23.55 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। इससे केंद्र सरकार के बजट पर हर साल करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का भारी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा था।
यदि आठवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो केंद्र सरकार को हर साल लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। चालू वित्तीय वर्ष के बजट अनुमान के मुताबिक केंद्र सरकार का सालाना सैलरी बिल ही लगभग 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है।
राज्य सरकारों के बजट पर भी दिखेगा बड़ा असर
देशभर की राज्य सरकारें लगभग 1.9 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे रोजगार देती हैं। राज्यों का कुल सालाना सैलरी और पेंशन बिल पहले से ही 9 से 10 लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर है। यदि अधिकांश राज्य पुराना पैटर्न अपनाते हैं, तो उनकी लागत 2.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ जाएगी।
केंद्रीय और राज्यों के खर्चों को जोड़ दें तो कुल अतिरिक्त बोझ करीब 3.9 लाख करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच सकता है। यह भारी-भरकम राशि भारत की कुल जीडीपी का लगभग 1.2 प्रतिशत हिस्सा होगी। इसी वजह से वित्तीय विशेषज्ञ भी लगातार नए वेतन आयोग के बजट गणित का सटीक आकलन करने में जुटे हैं।
कर्मचारी यूनियनों की मांग और विशेषज्ञों का ताजा अनुमान
बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने इस बार बड़े वेतन संशोधन की मांग सरकार के सामने रखी है। हालांकि, बाजार के आर्थिक विशेषज्ञ फिलहाल 2.5 से लेकर 3 के बीच ही फिटमेंट फैक्टर तय होने का मजबूत अनुमान लगा रहे हैं। सरकार जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।
Author: Rajesh Kumar


