मुजफ्फरनगर में किसान की हत्या के दोषियों को फांसी की सजा, 16 साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से कानून व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक बड़ा फैसला सामने आया है। यहाँ प्रधानी के चुनाव की पुरानी रंजिश में 16 वर्ष पहले हुई एक किसान की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने दो मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है।

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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

इस चर्चित मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत में हुई। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है।

खेत पर काम करते समय किसान राजबीर सिंह पर बरसाई गई थीं ताबड़तोड़ गोलियां

सरकारी वकीलों ने बताया कि तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव निवासी प्रदीप ने 24 अगस्त 2010 को इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित के पिता राजबीर सिंह जब अपने खेत पर काम कर रहे थे, तभी हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

वारदात में शामिल दो कुख्यात शार्पशूटरों को पुलिस मुठभेड़ में पहले ही कर चुकी है ढेर

पुलिस जांच में गांव के ही सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद के नाम सामने आए थे। इस जघन्य हत्याकांड में उनके साथ अमित और विपिन शर्मा नाम के दो पेशेवर अपराधी भी शामिल थे। पुलिस ने बाद में अगस्त 2011 में एक मुठभेड़ के दौरान अमित और विपिन शर्मा को मार गिराया था।

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अदालत में दलील पेश करते हुए सरकारी वकील ने उस दौर के खौफनाक जमीनी हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उस समय जिले में कई अपराधी गिरोह सक्रिय थे और भाड़े पर हत्याएं की जाती थीं। दोषियों के संबंध उस समय के जाने-माने कुख्यात शूटरों के साथ सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।

बहस के दौरान अदालत में प्रसिद्ध वेब सीरीज भौकाल और विक्की त्यागी कांड का जिक्र

एडीजीसी ने कोर्ट में तर्क दिया कि मुजफ्फरनगर की इसी अपराध पृष्ठभूमि और विक्की त्यागी हत्याकांड पर ही मशहूर वेब सीरीज भौकाल भी बनाई गई है। हालांकि, वर्तमान समय में सरकार की कड़ी नीतियों और पुलिस अभियानों के चलते कानून व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है और जीरो टॉलरेंस नीति लागू है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्रूरता की पुष्टि, किसान के शरीर पर मिले थे गोलियों के पांच निशान

चिकित्सकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि किसान राजवीर सिंह को बेहद करीब से पांच गोलियां मारी गई थीं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हत्या एक गोली मारकर भी की जा सकती थी, लेकिन अपराधियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। इसी बर्बरता के कारण दोषियों को फांसी दी गई है।

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