Lucknow News: उत्तर प्रदेश में अगले छह महीने में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी सरकार पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की।
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का सख्त निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल संवाद कर आगामी अभियानों की रूपरेखा भी तय की।
अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे सरकारी लाभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की पच्चीस करोड़ जनता हमारा अपना परिवार है। राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल भी विशेष रूप से मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे जिलों का लगातार दौरा कर विकास परियोजनाओं और जनसुविधाओं की जमीनी हकीकत की पड़ताल करते रहें।
शिक्षकों के लिए शुरू होगी कैशलेस चिकित्सा योजना
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी आठ जुलाई को वाराणसी से ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का भव्य शुभारंभ किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों और उनके परिजनों को पांच लाख रुपये तक का सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। वहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के साथ बैठक कर निःशुल्क यूनिफॉर्म, बैग, किताबें और जूते-मोजे के वितरण की स्थिति की खुद समीक्षा करें।
बारह जुलाई को चलेगा ऐतिहासिक वृक्षारोपण महाअभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी बारह जुलाई को पूरे प्रदेश में ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान का आयोजन किया जाएगा। इस महाअभियान की सफलता के साथ ही उत्तर प्रदेश कुल दो सौ पचहत्तर करोड़ पौधे रोपित करने का एक नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने सभी सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अगले दो दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के साथ बैठकें करें। वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन कर अपनी मांग वन विभाग को तत्काल सौंपें।

