Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मानसून की तैयारियों को लेकर अहम समीक्षा बैठक की है। सरकार ने पहाड़ी जिलों में भूस्खलन से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर मुस्तैदी बढ़ा दी है। राज्य के सभी संवेदनशील इलाकों में यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सड़कें खोलने के लिए संवेदनशील स्थानों पर भारी मशीनें तैनात
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मुख्य अभियंताओं के साथ विशेष रणनीतिक बैठक की। इसके बाद उन्होंने बताया कि रामपुर, सिरमौर और कुल्लू जैसे दुर्गम पहाड़ी जनपदों में आधुनिक मशीनें तैनात की गई हैं। मौजूदा समय में बंद पड़ी करीब 104 छोटी और लिंक सड़कों को अगले एक-दो दिन के भीतर पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
विभाग ने मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्यभर में 1506 मशीनें तैनात की हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी भारी बारिश के महीनों में सेब बागवानों को अपनी फसलें मंडियों तक पहुंचाने में किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी दिक्कत न आए।
धर्मांतरण कानून को लेकर कांग्रेस सरकार के इतिहास का जिक्र
कैबिनेट मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश में सबसे पहले धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून कांग्रेस पार्टी की सरकार ही लेकर आई थी। यह ऐतिहासिक कदम पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान ही उठाया गया था।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सिटिंग जज से जांच की मांग
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखा बयान देते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज अपनी दी गई चांदी का हिसाब लिखित रूप में मांग रहा है। इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले और गबन की आशंका है।

