Delhi News: दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी सऊदी अरामको ने एशियाई ग्राहकों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक कटौती की है। कंपनी ने अगस्त महीने की सप्लाई के लिए अपने सबसे लोकप्रिय अरब लाइट क्रूड के दामों को रिकॉर्ड स्तर तक घटा दिया है।
सऊदी अरब के इस बड़े कदम से भारत और चीन जैसे प्रमुख आयातक देशों को बड़ी राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस भारी गिरावट के बाद अब भारतीय घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल के दाम सस्ते होने की उम्मीद काफी बढ़ गई है।
वर्ष 2003 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरामको ने अरब लाइट क्रूड का दाम रीजनल ओमान-दुबई बेंचमार्क से एक दशमलव पांच शून्य डॉलर प्रति बैरल कम तय किया है। जुलाई के मुकाबले यह सीधे ग्यारह डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड गिरावट है, जो वर्ष दो हजार तीन के बाद की सबसे बड़ी कटौती है।
इस बड़ी गिरावट के साथ ही ऑफिशियल सेलिंग प्राइस जून दो हजार बीस के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है। वैश्विक बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक इसी तरह नरम बने रहते हैं, तो आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
एशियाई बाजार में हिस्सेदारी वापस पाने के लिए छिड़ा प्राइस वॉर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम होने के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में सऊदी अरब एशियाई बाजार, विशेषकर भारत और चीन में अपनी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी को दोबारा हासिल करना चाहता है।
अरामको के लिए चीन सबसे बड़ा बाजार है, जहां पिछले कुछ समय में उसका आयात घटकर करीब आधा रह गया था। कीमतों में इस भारी कटौती के बाद अब चीनी और भारतीय सरकारी रिफाइनरियां एक बार फिर सऊदी अरब से कच्चे तेल की भारी मात्रा में खरीदारी शुरू कर सकती हैं।
सऊदी अरब के सामने यूएई, इराक और कुवैत की बड़ी चुनौती
सऊदी अरब के इस कदम के बावजूद तेल बाजार में उसकी राह इतनी आसान नहीं होने वाली है। संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत जैसे अन्य खाड़ी देश अपने कच्चे तेल पर पहले से ही इससे भी ज्यादा छूट दे रहे हैं, जिससे एशियाई खरीदारों के पास कई सस्ते विकल्प मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार में प्राइस वॉर और अधिक तेज हो सकता है। हालांकि, यह पूरा गणित होर्मुज स्ट्रेट के समुद्री मार्ग पर निर्भर करता है। यदि इस मार्ग में कोई नया तनाव नहीं होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर टिकी रहेंगी।

