Washington News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व राजनीतिक तनाव के कारण स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज में स्थिति बिगड़ गई है। पिछले 24 घंटे के भीतर इस संवेदनशील समुद्री मार्ग में तीसरे कमर्शियल टैंकर को निशाना बनाया गया है। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले से कमर्शियल टैंकर को पहुंचा भारी नुकसान
ब्रिटिश नौसेना की सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने इस ताजा हमले की पूरी जानकारी साझा की है। एजेंसी के मुताबिक एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने कमर्शियल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे उसे संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने की खबर नहीं है।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले के बाद समुद्र में किसी तरह का तेल रिसाव या प्रदूषण नहीं देखा गया है। सुरक्षा जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। इस क्षेत्र से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और बेहद सावधानी बरतने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
कतर के एलएनजी कैरियर और सऊदी अरब के ऑयल टैंकर पर हमला
यह हमला मंगलवार को हुए दो अन्य बड़े समुद्री हमलों के बाद सामने आया है। इससे पहले कतर के लिक्विफाइड नेचुरल गैस कैरियर और सऊदी अरब के एक कच्चे तेल के टैंकर को भी निशाना बनाया गया था। इन लगातार हो रहे हमलों से पूरे जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों के बीच भारी डर का माहौल बन गया है।
ताजा हमले की जिम्मेदारी अभी तक दुनिया के किसी भी आतंकी या उग्रवादी संगठन ने नहीं ली है। यह घटना तब हुई जब कतर ने ईरान पर अपने एलएनजी कैरियर ‘अल रेकय्यात’ पर हमला करने का सीधा आरोप लगाया। कतर का यह जहाज रात के समय होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहा था।
कतर ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए ईरान को ठहराया जिम्मेदार
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने इस घटना की कड़े शब्दों में कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का खुला उल्लंघन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला बताया है। कतर ने इस पूरी घटना की कानूनी जिम्मेदारी सीधे तौर पर तेहरान प्रशासन पर डाली है।
यह सैन्य तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब पिछले महीने ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच 60 दिनों का अंतरिम सीजफायर समझौता हुआ था। दोनों देश स्थायी शांति के लिए बातचीत का रास्ता तलाश रहे थे। लेकिन पिछले हफ्ते कतर में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।

