Hamirpur News: स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं, स्वैच्छिक, हमीरपुर कोर्ट ने दिया बिजली 10 दिनों में बहाल करने का आदेश

Hamirpur News: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की एक अदालत ने स्मार्ट मीटर विवाद में उपभोक्ता के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिजली बोर्ड को आदेश दिया है कि स्मार्ट मीटर न लगाने के कारण काटी गई बिजली सप्लाई को 10 दिनों के भीतर तुरंत बहाल किया जाए।

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यह महत्वपूर्ण आदेश हमीरपुर कोर्ट नंबर 3 की सिविल जज टीना मल्होत्रा की अदालत ने जारी किया है। जैसा कि दस्तावेज़ 1000028140.jpg और 1000028145.jpg में देखा जा सकता है, अदालत ने जैमल सिंह बनाम एसडीओ एचपीएसईबीएल लंबलू मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता को बड़ी राहत प्रदान की है।

स्मार्ट मीटर लगाना स्वैच्छिक, जबरन बिजली काटना कानूनन गलत

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की नीति के तहत स्मार्ट एनर्जी मीटर लगाना स्वैच्छिक है, न कि अनिवार्य। बिजली बोर्ड किसी भी उपभोक्ता को इसके लिए मजबूर नहीं कर सकता। बिना सहमति के मीटर बदलने के नाम पर बिजली काटना पूरी तरह गलत है।

मामले के अनुसार, लंबलू क्षेत्र के व्यवसायी जैमल सिंह को बिजली बोर्ड ने स्मार्ट मीटर न लगाने पर बिजली काटने का नोटिस दिया था। इसके बाद उनकी दुकान की बिजली काट दी गई थी। कोर्ट ने माना कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को इस तरह रोकना कानून के खिलाफ है।

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अदालत ने पुराने मीटर के आधार पर ही सप्लाई जोड़ने को कहा

जैसा कि दस्तावेज़ 1000028145.jpg में उल्लिखित है, सिविल जज ने अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए उत्तरदाता को आदेश दिया है। बोर्ड को 10 दिनों के भीतर पुराने चालू मीटर के आधार पर ही दुकान की बिजली व्यवस्था बहाल करनी होगी, जब तक मुख्य केस का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता।

इस फैसले से उन सभी व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जो बिना मर्जी के स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बिजली काटे जाने का विरोध कर रहे थे। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कानून की आड़ में किसी भी नागरिक को परेशान नहीं किया जा सकता।

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