व्यभिचार साबित करने के लिए मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और होटल स्टे की डिटेल देना निजता का हनन नहीं: सुप्रीम कोर्ट

New Delhi News: देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने शुक्रवार को एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले निजता के अधिकार (Right to Privacy) का इस्तेमाल कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी से मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और होटल की जानकारी छिपाने के लिए नहीं कर सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेषकर तब जब मामला कोर्ट में व्यभिचार (Adultery) साबित करने से जुड़ा हो, निजता की आड़ नहीं ली जा सकती। शीर्ष अदालत ने उस पति की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसने दावा किया था कि फैमिली कोर्ट में उसकी ऐसी पर्सनल जानकारियां सार्वजनिक करना उसके मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के पुराने आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार कोई असीमित या पूर्ण अधिकार नहीं है। सार्वजनिक हित और न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की ही एक संविधान पीठ के पुराने आदेश का हवाला दिया था। उस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि शादी के अस्तित्व में रहते हुए, विवाह से इतर सहमति से बनाए गए किसी भी प्रकार के यौन संबंधों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कोई कानूनी संरक्षण या प्रोटेक्शन नहीं दिया जा सकता।

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फैमिली कोर्ट के आदेश को उच्च न्यायालय ने माना था सही

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें पति के होटल में ठहरने के रिजर्वेशन विवरण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) स्पष्ट रूप से व्यभिचार को तलाक का एक वैध आधार मानता है।

उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह बिल्कुल भी जनहित में नहीं होगा कि अदालत निजता के अधिकार की आड़ में किसी ऐसे विवाहित पुरुष की मदद करे, जिस पर बाहर किसी अन्य महिला से संबंध बनाने का आरोप हो। हाईकोर्ट के इसी कड़े फैसले के खिलाफ पति ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन फाइल की थी।

जानिए क्या है यह हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद साल 1998 में शादी के बंधन में बंधे एक जोड़े से जुड़ा हुआ है, जिनकी साल 2000 में एक बेटी हुई थी। शादी के कुछ समय बाद पत्नी को अचानक पता चला कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) चल रहा है और वह उस महिला के साथ जयपुर के एक होटल में रुका था।

पति के इस धोखे का पता चलने के बाद पत्नी ने कानूनी रास्ता अपनाया और व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग की। अपने आरोपों को साबित करने के लिए पत्नी ने अदालत से पति के कॉल रिकॉर्ड और होटल स्टे की डिटेल्स मंगवाने की गुहार लगाई थी, जिसे पति ने निजता का हनन बताते हुए चुनौती दी थी, जो अब खारिज हो गई है।

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