Himachal News: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे किसानों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। सरकार ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब सख्त रुख अपना लिया है। 22वीं किस्त जारी होने के बाद कृषि विभाग गांव-गांव जाकर एक डिजिटल सर्वे कर रहा है। जो लोग खेती नहीं करते हैं या अपात्र होने के बावजूद योजना का फायदा उठा रहे हैं, उनका नाम लिस्ट से काटा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में यह सर्वे अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है। अगर आपने अपना सही पंजीकरण नहीं करवाया है, तो आपको मिलने वाले सालाना 6 हजार रुपये बंद हो सकते हैं।
हमीरपुर में डिजिटल सर्वे का आखिरी चरण
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में कृषि विभाग का डिजिटल एग्रीकल्चर सर्वे अंतिम चरण में है। विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3,14,139 सर्वे पूरे किए जा चुके हैं। इनमें से 1,84,174 किसानों के डाटा को मंजूरी मिल गई है। जिले में 59.11 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण सुरक्षित हो चुका है। यह महा-अभियान अब जिले के आधे से ज्यादा किसानों तक अपनी पहुंच बना चुका है।
इन लोगों की तुरंत बंद होगी सम्मान निधि
कृषि विभाग इस डिजिटल सर्वे के जरिए अपात्र लोगों की सख्त पहचान कर रहा है। सरकार के रडार पर मुख्य रूप से वो लोग हैं जो अब खेती नहीं करते हैं। जमीन पर निष्क्रिय पाए जाने वाले लोगों की किस्त तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएगी। फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने वालों को अब बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा। ऐसे अपात्र लोगों का नाम सम्मान निधि की सूची से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा।
पंचायत सहायकों को दिए गए कड़े निर्देश
अभी भी कई असली और पात्र किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने एक अहम और बड़ा फैसला लिया है।
- पंचायत सहायकों को तुरंत प्रभाव से नए निर्देश जारी किए गए हैं।
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस विशेष काम में लगाया गया है।
- उन्हें घर-घर जाकर छूटे हुए किसानों का पंजीकरण करवाने के आदेश हैं।
- तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहे किसानों की पूरी मदद करने को कहा गया है।
गांव-गांव चल रहा है विशेष जागरूकता अभियान
कृषि विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी योग्य किसान इस आर्थिक मदद से न छूटे। इसलिए हर गांव में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिन किसानों को योजना की पूरी जानकारी नहीं है, उन्हें जागरूक किया जा रहा है। 24 फरवरी 2019 को शुरू हुई इस योजना में किसानों को सालाना 6 हजार रुपये मिलते हैं। अब तक 22 किस्तें सफलतापूर्वक असली किसानों के बैंक खातों में पहुंच चुकी हैं।


