West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस के बीस बागी लोकसभा सदस्यों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी आफ इंडिया यानी एनसीपीआई में विलय की घोषणा ने सबको चौंका दिया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद से यह कम जानी-पहचानी पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में आ गई है, जिसे पहले बहुत कम लोग जानते थे।
यह दल अब बिना कोई नया लोकसभा चुनाव लड़े ही सीधे बीस सांसदों वाली बड़ी पार्टी बनने जा रहा है। यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे देते हैं, तो संसद के निचले सदन में यह देश की छठी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन जाएगी।
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में बढ़ेगा कद
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग में यह भारतीय जनता पार्टी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। यह दल संसद में तेलुगु देशम पार्टी के सोलह सांसदों और जनता दल यूनाइटेड के बारह सांसदों से भी काफी आगे निकल जाएगा, जो भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास होगा।
हैरानी की बात यह है कि इस राजनीतिक दल के पास वर्तमान में कोई सांसद, विधायक या स्थानीय निकाय पार्षद तक नहीं है। वर्ष 2022-23 की सालाना ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इस दल के पास कैश के रूप में मात्र पचहत्तर रुपये का बैलेंस बचा हुआ था।
दल बदलने वाले नेताओं को नकारने का पुराना नारा
इसे देश की राजनीति की एक बड़ी विडंबना ही कहेंगे कि तीन साल पहले जिस दल ने दलबदलुओं को नकारने का नारा दिया था, आज वही बागी नेताओं का स्वागत कर रहा है। इस दल ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में दलबदलुओं के खिलाफ अपने चार प्रत्याशी भी उतारे थे।
त्रिपुरा चुनाव की चारों सीटों पर इसके उम्मीदवारों को नोटा से भी बेहद कम वोट मिले थे। निर्वाचन आयोग में पंजीकृत इस गैर-मान्यता प्राप्त दल की शुरुआत पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से हुई थी। इसके अध्यक्ष उत्तमिया कुंडू की सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हैं।
Author: Harikarishan Sharma


