यूपी के इस गांव में पसरा खौफनाक सन्नाटा, पुलिस के डर से घरों में ताले लगाकर भागे सभी पुरुष

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के नरहरपुर गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई भारी हिंसक झड़प के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी गांव में चारों तरफ खौफनाक सन्नाटा और दहशत का माहौल पसरा हुआ है। पुलिस की गिरफ्तारी के डर से गांव के सभी पुरुष अपने-अपने घरों में ताले जड़कर फरार हो गए हैं। अब पूरे गांव में केवल सहमी हुई महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे ही बचे हैं।

दलित महिलाओं ने पुलिस पर लगाए संगीन आरोप

गांव की दलित बस्ती की महिलाओं ने पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर उनके साथ बेहद अभद्र और अमानवीय व्यवहार किया है। ग्रामीणों का यह भी कड़ा दावा है कि पुलिस ने गांव में आए निर्दोष रिश्तेदारों को भी बिल्कुल नहीं बख्शा। उन्हें बिना किसी वजह बेरहमी से पीटा गया और जबरन हिरासत में ले लिया गया। बुजुर्ग महिलाओं ने अपने शरीर पर लगी चोटें भी दिखाई हैं।

दहशत के साये में नहीं मनी अंबेडकर जयंती

इस पूरे भारी तनाव का सबसे ज्यादा असर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती समारोह पर देखने को मिला है। यह जयंती हर साल गांव में बड़े हर्षोल्लास और भव्य तरीके से मनाई जाती थी। लेकिन इस बार पुलिस की दहशत और खौफ के कारण सारा उत्सव पूरी तरह से फीका रहा। डरे हुए ग्रामीणों ने सभी तरह की झांकियां और सामूहिक कार्यक्रमों को पूरी तरह रद्द कर दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की पीड़ा को जायज बताया है।

अवैध कब्जा हटाने के दौरान भड़की थी भीषण हिंसा

इस पूरे बड़े विवाद की जड़ सुरक्षित भूमि से अवैध कब्जा हटाने की एक प्रशासनिक कार्रवाई है। पुलिस के मुताबिक, जब राजस्व विभाग की टीम वहां से कब्जा हटाने पहुंची थी, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने भारी पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए पथराव में एक दरोगा और सिपाहियों सहित कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने 19 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ सख्त मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने नौ लोगों को भेजा जेल, भारी फोर्स तैनात

इस मामले में पुलिस ने अपनी सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक नौ लोगों को सीधा जेल भेज दिया है। कोतवाल कृष्ण मोहन सिंह ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी थी। गांव में फिलहाल शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ कोई अन्याय बिल्कुल नहीं होगा।

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