West Bengal News: पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस में मची आंतरिक बगावत अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का समर्थन करने के लिए लोकसभा स्पीकर से संपर्क करने वाले बागी नेताओं पर ममता बनर्जी खेमे ने बेहद तीखा हमला बोला है।
इस अप्रत्याशित बगावत से अब तृणमूल कांग्रेस के पूरी तरह टूटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने आज बागी गुट की इस राजनीतिक पैंतरेबाजी को खुली धोखाधड़ी करार दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि धोखेबाजों के जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
दोहरे चरित्र वाले लोगों के जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं
सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि दोहरे चरित्र वाले लोग खुद ही चले गए हैं। जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, वह जा सकता है। आपके जाने से हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन आप अब तृणमूल और ममता बनर्जी के नाम का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकते।
उन्होंने आज सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि बीजेपी इनमें से किसी भी बागी को अपने साथ शामिल नहीं करेगी। लोकसभा सांसद ने कहा कि बागी गुट के पास किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में अपने गुट का कानूनी विलय करने के लिए पर्याप्त तकनीकी संख्या बल मौजूद नहीं है।
अभिषेक बनर्जी की मनाने की कोशिशें फेल और बागी अपनी बात पर अड़े
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक तृणमूल आलाकमान ने बागी नेताओं को मनाने के लिए अंदरूनी तौर पर संपर्क साधा है। पार्टी के दिग्गज लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी बागी सांसदों को वापस आने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि नाराज बागी सांसद अब अपनी पुरानी बात पर मजबूती से अड़े हुए हैं।
लगभग बीस बागी सांसदों ने कल पार्टी आलाकमान को एक बेहद साफ और कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने ममता बनर्जी के फैसले को सीधी चुनौती देते हुए अपना नया चीफ व्हिप चुना और काकोली घोष दस्तीदार को यह जिम्मेदारी सौंप दी। ममता ने यह अहम पद कल्याण बनर्जी को दिया था।
क्या केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों के डर से बागियों ने बदला पाला
इन बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने की अपनी इच्छा आधिकारिक तौर पर जताई थी। इस पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि वे कोई भी कानूनी कदम उठाने से पहले स्पीकर के फैसले का इंतजार करेंगे। उन्होंने पूछा कि क्या बागी नेता केंद्र सरकार से डरे हुए हैं।
बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती दी कि वे अपने चुनाव क्षेत्र में जाकर उन मतदाताओं का सामना करें जिन्होंने उन्हें वोट दिया था। पश्चिम बंगाल चुनावों में तृणमूल की करारी हार के बाद पंद्रह साल के शासन का अंत हो गया है। इकहत्तर वर्षीय ममता बनर्जी अब अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं।
Author: Sourav Banerjee


