New Delhi News: क्या आपको याद है कि आखिरी बार आपने बैंक की लाइन में लगकर पैसे कब निकाले थे? शायद नहीं। भारत में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार ने अब एक नया इतिहास रच दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में यूपीआई (UPI) से होने वाले लेन-देन का आंकड़ा 300 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। हर महीने करीब 30 लाख करोड़ रुपये का पेमेंट सिर्फ स्मार्टफोन की स्क्रीन छूकर हो रहा है। देश की सब्जी मंडी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जेब में अब कैश नहीं, बल्कि स्कैनर है। भारत की इस प्रचंड सफलता ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है।
हर महीने 30 लाख करोड़ के करीब पहुंची रकम
यूपीआई अब महज कोई सुविधा नहीं है, यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की सबसे बड़ी आदत बन चुका है। आप चाय की टपरी पर खड़े हों या ऑटो में सफर कर रहे हों, हर जगह लोग क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करते नजर आते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने यूपीआई ट्रांजैक्शन की वैल्यू 30 लाख करोड़ रुपये के बेहद करीब पहुंच चुकी है। यह भारी-भरकम आंकड़ा साफ बताता है कि देश की जनता ने इस स्वदेशी पेमेंट सिस्टम पर कितना गहरा भरोसा जताया है। नकद में लेन-देन अब गुजरे जमाने की बात होती जा रही है।
अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा है यह बदलाव?
यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने जब इसे शुरू किया था, तब किसी ने इतनी बड़ी क्रांति की उम्मीद नहीं की थी। एक ही वित्तीय वर्ष में 300 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार होना भारतीय अर्थव्यवस्था की एक बेहद मजबूत तस्वीर पेश करता है। इस सिस्टम ने काले धन पर लगाम कसने और लेन-देन में पारदर्शिता लाने का बड़ा काम किया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों का पैसा अब बिना किसी झंझट के सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रहा है।
भारत के डिजिटल मॉडल को सलाम कर रही है दुनिया
भारत का यह स्वदेशी यूपीआई अब सात समंदर पार भी अपनी ताकत दिखा रहा है। फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे कई देशों में इसकी शानदार शुरुआत हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अब भारत के इस सफल डिजिटल पेमेंट मॉडल की मिसालें दी जाती हैं। दुनिया के कई बड़े और विकसित देश इसे अपने यहां लागू करने के लिए कतार में खड़े हैं। यह सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम की कामयाबी नहीं है, बल्कि तकनीक की दुनिया में भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत है।


