Delhi News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सोशल मीडिया और कर्मचारी संगठनों के बीच इन दिनों बेसिक सैलरी को ₹18,000 से सीधे ₹69,000 करने की चर्चा तेजी से चल रही है।
कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के सामने 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की जोरदार मांग उठाई है। इस नए फॉर्मूले के पीछे सबसे बड़ा तर्क यह है कि अब सैलरी तय करते समय परिवार के सदस्यों की संख्या को 3 से बढ़ाकर 5 माना जाना चाहिए। इसके पीछे माता-पिता की देखभाल का खर्च मुख्य वजह है।
माता-पिता की जिम्मेदारी और प्राइवेट सेक्टर से तुलना
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक माता-पिता की देखभाल करना हर कर्मचारी का कानूनी और सामाजिक कर्तव्य है। इसलिए वेतन आयोग को उनके खर्चों को भी सैलरी का हिस्सा बनाना होगा। इसी वजह से फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग पूरी मजबूती से रखी गई है।
निजी क्षेत्र से तुलना करने के सवाल पर साफ किया गया कि सरकारी कर्मचारी कठिन हालातों में गवर्नेंस संभालते हैं। देश के लगभग 80 फीसदी कर्मचारी बेहद पिछड़े इलाकों और भीषण गर्मी में बिना सुविधाओं के काम करते हैं। रेलवे और सेना जैसे विभागों के काम की तुलना किसी भी मुनाफे वाले प्राइवेट सेक्टर से नहीं हो सकती।
जोखिम वाले पदों के लिए विशेष अलाउंस की मांग
अंगद की तरह पैर जमाए बैठे कर्मचारी संगठनों ने मुश्किल जगहों जैसे रेलवे ट्रैक और बॉर्डर पर तैनात कर्मियों के लिए अलग पे-पैकेज की मांग की है। अनिल काकोदकर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि ड्यूटी के दौरान कई रेल कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
कर्मचारियों की सुरक्षा और रिस्क को देखते हुए हार्डशिप अलाउंस को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा इंक्रीमेंट को परफॉर्मेंस के बजाय फ्लैट 6% सालाना रखने की मांग की गई है। 7वें वेतन आयोग की कमियों को दूर करने के लिए ओपन-एंडेड पे-स्केल की वकालत की गई है।
मर्ज होगा 50% DA और पुरानी पेंशन की गूंज
महंगाई भत्ता (DA) 50 फीसदी के पार पहुंच चुका है, जिसे अब बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग की जा रही है। बाजार में गैस और तेल के दाम स्थायी रूप से बढ़ चुके हैं। ऐसे में पैसे की घटती वैल्यू को देखते हुए जेसीएम ने इसे परमानेंट करने का पॉइंट रखा है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए पेंशन को कर्मचारी का हक बताया गया है। रेलवे जैसे जोखिम भरे विभागों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग की गई है। साथ ही 65 और 70 साल की उम्र के बाद पेंशन में अतिरिक्त 5% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी आयोग के सामने है।
Author: Gaurav Malhotra


