टीएमसी में महाबगावत, चार बार की सांसद ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेता पर लगाए गंभीर आरोप, हिल गई ममता सरकार

Kolkata News: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। पार्टी की कद्दावर नेता और चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब खुलकर बगावती तेवर अपना लिए हैं। इससे राज्य की सियासत में भारी खलबली मच गई है।

सांसद काकोली घोष ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक बेहद गोपनीय शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने टीएमसी सांसद और पार्टी के नए चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी पर संसद के भीतर महिला सांसदों के साथ बेहद अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है।

चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी दूरियां

काकोली घोष ने स्पीकर से कल्याण बनर्जी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद तब शुरू हुआ जब ममता बनर्जी ने काकोली को लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटाकर यह बड़ी जिम्मेदारी अचानक कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी।

इस फैसले से नाराज काकोली ने सुब्रत बख्शी को अपना त्यागपत्र भेजकर पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस इस्तीफे में राज्य के कई संवेदनशील मुद्दों को उठाकर सीधे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल दागे हैं।

इस्तीफे के पत्र में भ्रष्टाचार और आरजी कर कांड का जिक्र

काकोली घोष ने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले और विभिन्न सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता जताई है। इसके साथ ही उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की दर्दनाक मौत के मामले को भी अपने इस्तीफे का मुख्य आधार बनाया है।

डॉक्टर काकोली ने पार्टी की चुनावी रणनीति में बाहरी एजेंसी आई-पैक के बढ़ते दखल का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि संगठन में गैर-निर्वाचित लोगों का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसकी वजह से पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता अब खुद को बेहद उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने से बढ़ा सस्पेंस

पदों से इस्तीफा देने के तुरंत बाद काकोली घोष कल्याणी में भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में शामिल हुईं। टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें वहां जाने से मना किया था, लेकिन उन्होंने पार्टी के इस आदेश की कोई परवाह नहीं की।

बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि काकोली घोष ने उनसे मिलकर कहा कि अब आखिरकार उन्हें तानाशाही से आजादी मिल गई है। इस घटनाक्रम के बाद बंगाल की राजनीतिक गलियारों में उनके पाला बदलने की अटकलें अब काफी तेज हो गई हैं।

बीजेपी का बड़ा दावा और नगरपालिकाओं में मची भगदड़

इस संकट के बीच भाजपा सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी के करीब 20 सांसद इस समय भाजपा के सीधे संपर्क में हैं। हालांकि टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगात रॉय ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे झूठ का पुलिंदा बताया है।

तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह बड़ा बिखराव सिर्फ शीर्ष स्तर तक सीमित नहीं है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की सात नगरपालिकाओं से 100 से अधिक पार्षदों ने इस्तीफे दे दिए हैं। अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर नगरपालिका के भी 8 सदस्यों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

Author: Harikarishan Sharma

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