Karnataka News: केरल के बाद अब कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर भारी सियासी उठापटक शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी को लेकर खींचतान जारी है। पार्टी आलाकमान ने इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों दिग्गज नेताओं को तत्काल दिल्ली बुलाया है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आज एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। सुबह ग्यारह बजे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे दोनों नेताओं से बातचीत करेंगे। सूत्रों का कहना है कि पहले दोनों नेताओं से अलग-अलग मुलाकात होगी। इसके बाद उन्हें एक साथ बैठाकर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिल्ली बुलावें की पुष्टि की है। सत्ताहत्तर वर्षीय नेता ने कहा कि उन्हें बैठक के असल मुद्दे की स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने इसे सामान्य अटकलबाजी करार दिया है। इसी साल जनवरी में उन्होंने राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को शुरुआत में दिल्ली आने का कोई आधिकारिक न्योता नहीं मिला था। उन्होंने साफ कहा था कि बुलावा आने पर ही वह दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री बदलने पर टिप्पणी करने से भी उन्होंने इनकार किया था। हालांकि, देर शाम उनके अचानक दिल्ली पहुंचने से सियासी हलचल काफी तेज हो गई है।
ढाई साल के फॉर्मूले पर फंसा है पूरा पेंच
कर्नाटक में नेतृत्व का यह विवाद पिछले साल नवंबर महीने में ही भड़क गया था। तब राज्य में कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे कर लिए थे। शिवकुमार गुट लगातार साल दो हज़ार तेईस में बने पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की याद दिला रहा है, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन का वादा था।
पिछले हफ्ते डीके शिवकुमार के जन्मदिन पर उनके समर्थकों ने बड़ा दांव चला। समर्थकों ने उन्हें भावी मुख्यमंत्री बताते हुए बड़े-बड़े पोस्टर लगा दिए। इसके साथ ही जन्मदिन पर इसी संदेश वाले केक भी काटे गए। इससे राज्य की राजनीति में खलबली मच गई। हालांकि सिद्धारमैया आलाकमान के फैसले का सम्मान करने की बात कहते हैं।
कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के कुल एक सौ छत्तीस विधायक मौजूद हैं। इनमें से सौ से अधिक विधायक खुलकर सिद्धारमैया का पूरा समर्थन करते हैं। यह भारी संख्याबल उन्हें कुर्सी की दौड़ में सबसे आगे रखता है। दलित और पिछड़े वर्गों पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक बेहद ताकतवर नेता बनाती है।
कांग्रेस आलाकमान के पास मौजूद हैं तीन बड़े विकल्प
नेतृत्व संकट को दूर करने के लिए पार्टी नेतृत्व के पास तीन मुख्य रास्ते बचे हैं। पहला विकल्प सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद पर बनाए रखना है। इसके साथ ही उन्हें लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार की पूरी छूट मिल सकती है। इससे शिवकुमार को इंतजार करने का कड़ा संदेश मिल जाएगा।
दूसरा विकल्प डीके शिवकुमार को राज्य में ज्यादा शक्तिशाली बनाना है। उन्हें सरकार में कुछ और अहम विभाग भी सौंपे जा सकते हैं। वहीं सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाकर बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जा सकती है। उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाकर केंद्र में उनके लंबे अनुभव का सीधा फायदा उठाया जा सकता है।
तीसरा और सबसे चौंकाने वाला विकल्प अचानक सत्ता परिवर्तन का हो सकता है। आलाकमान सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए मना सकता है और शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री बना सकता है। यह फैसला पुराने समझौते के बिल्कुल मुताबिक होगा। इससे शिवकुमार का खेमा खुश होगा, लेकिन पार्टी में नई बगावत का बड़ा खतरा भी बढ़ जाएगा।
Author: Suresh Gowda

