Middle East News: दुनिया इस वक्त दो तरह के ‘ट्रैफिक’ में फंसी है। एक तरफ मध्य पूर्व में बारूद की गंध है, जहां ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत ‘अब्राहम लिंकन’ को डुबोने की सीधी धमकी दी है। दूसरी तरफ हमारे अपने शहर की सड़कों पर वाहनों का अंतहीन रेला है। वैश्विक पटल पर तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। वहीं स्थानीय स्तर पर पार्किंग और अतिक्रमण ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। हालात यह हैं कि चाहे तेहरान की सीमा हो या शहर का मुख्य बाजार, हर जगह ‘गतिरोध’ बना हुआ है।
अब्राहम लिंकन को डुबोने की धमकी और खौफ का साया
मिडिल ईस्ट में तनाव अब उस मुहाने पर है जहां से वापसी मुमकिन नहीं लगती। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ उसकी रेंज में दिखा तो अंजाम बुरा होगा। ईरान ने हाल के दिनों में ड्रोन और मिसाइल हमलों की रफ्तार तेज कर दी है। इसके जवाब में अमेरिका और इजरायल ने भी अपने लड़ाकू विमानों को ‘नाइट मिशन’ के लिए तैयार रखा है। पूरी दुनिया की नजरें अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टिकी हैं। यहां जरा सी चिंगारी वैश्विक तेल आपूर्ति को ठप कर सकती है।
खाड़ी में हाई अलर्ट और एयर डिफेंस सिस्टम
यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। दुबई और दोहा के आसमान में अब रडार की नजरें हर पल तैनात हैं। एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी हवाई हमले को हवा में ही ध्वस्त किया जा सके। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष लंबा खिंचा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था घुटनों पर आ जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की अपील भी फिलहाल बेअसर साबित हो रही है।
शहर की सड़कों पर जाम का जानलेवा खेल
इधर शहर की बात करें तो यहां की सड़कें रोजाना रेंग रही हैं। शहर का कोई भी प्रमुख बाजार या सड़क ऐसी नहीं बची, जहां वाहन चालकों को जाम न झेलना पड़े। प्रशासनिक दावों के बावजूद पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। बाजार में लोग सड़क किनारे ही गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं। इससे पैदल चलने वालों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी रास्ता नहीं मिल पाता। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आती है।
पार्किंग का अभाव और प्रशासन की लाचारी
बाजारों में अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग ने जाम की समस्या को नासूर बना दिया है। वाहन चालकों का कहना है कि वे जाएं तो आखिर कहां जाएं? पार्किंग स्थल न होने के कारण जुर्माना भी भुगतना पड़ता है और समय भी बर्बाद होता है। सड़कों का चौड़ीकरण तो हुआ लेकिन उन पर अवैध कब्जे कम नहीं हुए। प्रशासन रोज नए नियम बनाता है, लेकिन जमीन पर उनका असर शून्य दिखता है। हर रोज हजारों लीटर ईंधन इसी जाम की भेंट चढ़ जाता है।
सप्लाई चेन और आम आदमी की मुसीबत
जिस तरह मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, ठीक वैसे ही शहर के जाम से स्थानीय व्यापार और दैनिक जीवन प्रभावित है। लोग समय पर दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं और न ही व्यापारिक सामान की डिलीवरी समय पर हो पा रही है। एक तरफ वैश्विक संकट है और दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन की विफलता। इन दोनों पाटों के बीच सिर्फ और सिर्फ आम आदमी पिस रहा है।


