क्या आप जानते हैं देश के रक्षक इन जांबाज कमांडो की इनसाइड स्टोरी? गृह मंत्रालय के ये सात बल ऐसे बचाते हैं सबकी जान

India News: भारत की करीब 145 करोड़ आबादी की सुरक्षा के लिए विभिन्न सुरक्षा बल हमेशा मुस्तैद रहते हैं। देश में किसी तनाव, चुनाव या बड़ी आपातकालीन स्थिति के समय अर्धसैनिक बल ही कमान संभालते हैं। ये बल केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं और देश की आंतरिक और बाहरी सीमाओं की रक्षा करते हैं।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के तहत सुरक्षा का चक्रव्यूह

भारत में अर्धसैनिक बलों का मुख्य तात्पर्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) से होता है। गृह मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में काम करने वाले इस सीएपीएफ संगठन के तहत देश के सात प्रमुख विशिष्ट बल शामिल हैं। इन सभी का प्राथमिक कार्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की कड़ी सुरक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखना है।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) इस बेड़े का सबसे बड़ा बल है, जिसकी स्थापना वर्ष 1939 में हुई थी। यह बल राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने और उग्रवाद का मुकाबला करने में माहिर माना जाता है। दंगों को नियंत्रित करने में भी सीआरपीएफ के जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देश की सीमाओं और औद्योगिक परिसरों की मजबूत ढाल

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटी सीमाओं पर तैनात रहता है, जिसे भारत की प्रथम रक्षा पंक्ति कहते हैं। वहीं, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) देश के सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स, मेट्रो, परमाणु संयंत्रों, अंतरिक्ष केंद्रों और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करता है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जांबाज सैनिक लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैले कठिन पहाड़ी क्षेत्रों और चीन सीमा की कड़े पहरेदारी करते हैं। इसके साथ ही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) नेपाल और भूटान से जुड़ी भारत की खुली सीमाओं पर सुरक्षा और खुफिया जानकारी जुटाता है।

पूर्वोत्तर के प्रहरी और देश की अचूक ब्लैक कैट कमांडो यूनिट

असम राइफल्स को गृह मंत्रालय ने मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और म्यांमार सीमा की रक्षा करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। यह भारत का सबसे पुराना बल है, जो दुर्गम जंगलों में रहकर देश विरोधी ताकतों को लगातार मुंहतोड़ जवाब देता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) देश की सबसे खतरनाक और विशिष्ट आतंकवाद-रोधी कमांडो यूनिट है। इसकी स्थापना वर्ष 1984 में एक विशेष आकस्मिक बल के रूप में हुई थी। यह बल देश में केवल बंधक-मुक्ति और अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में या अति-विशिष्ट वीआईपी सुरक्षा के लिए ही तैनात होता है।

Author: Harikarishan Sharma

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