वैश्विक मंदी और युद्ध के बीच रॉकेट बनी भारत की जीडीपी, वित्त मंत्री ने राहुल गांधी पर साधा तीखा निशाना

Karnataka News: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आने वाले सालों में भी इसकी विकास दर मजबूत रहने की पूरी उम्मीद है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में यह बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार आर्थिक मजबूती दिखा रहा है।

वित्त मंत्री ने ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ कार्यक्रम में देश की आर्थिक प्रगति की तारीफ की। उन्होंने कहा कि तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में हमारा देश सबसे तेज गति से विकास के नए रिकॉर्ड बना रहा है।

वित्त मंत्री ने राहुल गांधी के दावों को बताया पूरी तरह गलत

निर्मला सीतारमण ने इस दौरान विपक्ष के बड़े नेता राहुल गांधी पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वे लगातार देश की बड़ी उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिश करते हैं। राहुल गांधी हर बार किसी बड़े आर्थिक संकट की भविष्यवाणी करते हैं, जबकि जमीनी वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

सीतारमण ने कहा कि कोविड महामारी और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसी गंभीर चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भी हमारी रफ्तार पर असर नहीं पड़ा। देश किसी बड़े आर्थिक संकट की ओर नहीं बढ़ रहा है, बल्कि सुरक्षित स्थिति में है।

जीडीपी आंकड़ों ने अर्थशास्त्रियों के पुराने अनुमानों को पीछे छोड़ा

वित्त मंत्री के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं है। देश के ताजा आर्थिक आंकड़े भी इस विकास की पूरी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की शानदार दर से आगे बढ़ी, जो पिछले साल 7.1 प्रतिशत थी।

जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह प्रदर्शन अर्थशास्त्रियों के पुराने अनुमानों से भी काफी बेहतर साबित हुआ है। भारत का मजबूत उपभोक्ता बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में निवेश इस शानदार विकास को लगातार गति दे रहे हैं।

पश्चिम एशिया के तनाव से मिल सकती है नई चुनौती

हालांकि, बड़े आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कुछ नई चुनौतियां आ सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल आयात पर निर्भर है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका की नई व्यापार नीतियां, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं भी हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था पर थोड़ा दबाव बना सकती हैं।

आरबीआई ने विकास दर के अनुमान में किया थोड़ा बदलाव

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने चालू वित्त वर्ष में 7 से 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था। हालांकि पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव के कारण इस अनुमान पर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इसी वजह से वित्तीय बाजारों में थोड़ी सतर्कता देखी जा रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि यदि आर्थिक सुधारों की गति जारी रही, तो भारत अगले कुछ सालों में फिर 7 प्रतिशत से अधिक की दर पा लेगा।

Author: Rajesh Kumar

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