Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) और प्रदेश के अन्य कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को बड़ा झटका लगा है। पूरे 12 साल बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस बढ़ाने का कड़ा फैसला लिया है। कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में 10 से 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी पर मुहर लग गई है। नया फीस स्ट्रक्चर अगले शैक्षणिक सत्र से लागू हो जाएगा। इससे पहले साल 2014 में छात्रों की फीस बढ़ाई गई थी।
क्यों लिया गया फीस बढ़ाने का बड़ा फैसला?
विश्वविद्यालय काफी लंबे समय से वित्तीय तंगहाली से जूझ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार से मिलने वाले बजट में भी कटौती हुई है। इसी आर्थिक संकट को देखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया। वित्त कमेटी ने फीस को तीन गुना करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन कुलपति ने छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ डालने से इनकार कर दिया। इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए न्यूनतम 10 और अधिकतम 40 फीसदी की ही बढ़ोतरी की गई है।
अब परीक्षा फॉर्म के लिए चुकाने होंगे 1200 रुपये
कार्यकारी परिषद (EC) ने लंबी चर्चा के बाद नई दरों को अपनी अंतिम मंजूरी दी है। अब स्नातक (ग्रेजुएशन) कक्षाओं के छात्रों को परीक्षा फॉर्म के लिए 800 रुपये की जगह 1200 रुपये देने होंगे। विश्वविद्यालय स्तर की मदों में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं कॉलेजों में यह बढ़ोतरी 40 प्रतिशत तक की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों की तुलना में यह फीस अभी भी बहुत कम है।
बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
फीस बढ़ोतरी के अलावा प्रशासन ने कई अन्य अहम फैसले भी लिए हैं। इस बैठक में विधायक हरीश जनार्था और उच्चतर शिक्षा निदेशक भी मौजूद रहे। छात्रों और कर्मचारियों के हित में लिए गए प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं:
- विश्वविद्यालय में सात सहायक आचार्यों (असिस्टेंट प्रोफेसर) के पद भरे जाएंगे।
- गैर शिक्षक कर्मचारियों के खाली पदों को भरने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है।
- विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक नई बस खरीदने का प्रस्ताव भी पास किया गया है।


