Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात की है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राज्य के विकास और गंभीर आर्थिक संकट पर लंबी चर्चा हुई। पीएम मोदी से मिलने के बाद जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य के ताजा हालात को ‘वित्तीय आपातकाल’ करार दिया। ठाकुर ने मंत्रियों और अधिकारियों का वेतन रोकने, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और एंट्री टैक्स बढ़ाने जैसे फैसलों को सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बताया है।
अधिकारियों का वेतन रोकना ‘वित्तीय आपातकाल’ का संकेत
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस वक्त बहुत बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। सरकार के नए फैसले हालात को और ज्यादा खराब कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें संसाधनों की कमी की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने खुद अपना 50 फीसदी वेतन छह महीने के लिए टाल दिया है। मुख्य सचिव और डीजीपी का आधा वेतन भी रोका जा रहा है। इसके अलावा आईएएस अधिकारियों और मंत्रियों का 30 फीसदी वेतन रोका गया है। विधायकों के वेतन में भी 20 फीसदी कटौती हुई है। जयराम ने कहा कि सरकार को अपने अधिकारियों की सैलरी रोकनी पड़ रही है, यह कंगाली का सबसे बड़ा सबूत है।
पेट्रोल-डीजल पर नया सेस लगाना सरकार की नाकामी
नेता प्रतिपक्ष ने सुक्खू सरकार के टैक्स वाले फैसलों पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर नया सेस लगाना पूरी तरह से गलत है। सामाजिक वर्गों के कल्याण के नाम पर आम जनता पर टैक्स का बोझ डालना ठीक नहीं है। यह सीधे तौर पर सरकार की प्रशासनिक नाकामी को दिखाता है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार अपनी खाली तिजोरी भरने के लिए आम जनता की जेब काट रही है।
एंट्री टैक्स बढ़ाने से तबाह होगा राज्य का पर्यटन उद्योग
जयराम ठाकुर ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका सीधा असर पड़ोसी राज्यों के साथ हमारे व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा। अगर दूसरे राज्य भी हिमाचल के खिलाफ ऐसे ही कदम उठाएंगे, तो राज्य का व्यापार पूरी तरह तबाह हो जाएगा। इसका सबसे ज्यादा और सीधा नुकसान हिमाचल के पर्यटन उद्योग को उठाना पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष संकट की इस घड़ी में राज्य के साथ है। सरकार को जनता के हित में सही और व्यावहारिक नीतियां बनानी होंगी।


