Bihar News: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। राज्य में आगामी अट्ठारह जून को विधान परिषद के चुनाव होने जा रहे हैं। एनडीए के नौ उम्मीदवारों की सूची में दीपक प्रकाश का नाम गायब है।
दीपक प्रकाश मौजूदा समय में राज्य सरकार के पंचायती राज मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं। हालांकि वह इस समय न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। इस स्थिति ने अब उनकी मंत्री पद की कुर्सी पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
संवैधानिक मजबूरी और मंत्री पद पर मंडराता हुआ बड़ा खतरा
भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार किसी भी गैर-सदस्य को मंत्री बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता लेनी अनिवार्य होती है। बिहार में विधान परिषद का अगला नियमित चुनाव अब सीधे मार्च दो हजार सत्ताइस में होना तय है।
दीपक प्रकाश को सात मई को सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इससे पहले वह पिछले साल नवंबर में नीतीश कुमार की सरकार में भी मंत्री बने थे। छह महीने की समय सीमा खत्म होने के कारण अब उन्हें अपना प्रतिष्ठित मंत्री पद गंवाना पड़ सकता है।
जानिए आखिर क्यों गठबंधन में नहीं मिल पाया मनपसंद टिकट
साल दो हजार पच्चीस के विधानसभा चुनावों में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को गठबंधन में छह सीटें मिली थीं। इनमें से पार्टी ने चार सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। खुद उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी सासाराम सीट से विधायक चुनी गई थीं।
पार्टी के पास चार विधायक होने के बावजूद बेटे को टिकट न मिलने पर उपेंद्र कुशवाहा ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि यह मामला अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने सभी एनडीए उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दर्ज करने की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं।
विलय के प्रस्ताव और पार्टी के अस्तित्व की अंदरूनी लड़ाई
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी चाहती थी कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी आरएलएम का पूरी तरह विलय बीजेपी में कर दें। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा इस प्रस्ताव के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुए। उन्होंने गठबंधन में रहकर अपनी पार्टी के स्वतंत्र वजूद पर जोर दिया।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू ने अपना उम्मीदवार बनाया है। निशांत कुमार भी फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। जेडीयू और बीजेपी ने अपने कोटे से कई नए और पुराने चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है।
मामला पहुंचा देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे
बिना किसी सदन का सदस्य रहे बार-बार मंत्री बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164 का स्पष्ट हवाला देते हुए दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने को पूरी तरह असंवैधानिक बताया गया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार सरकार इस तरह के कानूनी लूपहोल का फायदा उठाकर संवैधानिक प्रावधानों को तोड़ नहीं सकती है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा हुआ नहीं है। यह सीधे तौर पर देश के संवैधानिक लोकतंत्र की मर्यादा पर गंभीर सवाल उठाता है।
Author: Harikarishan Sharma


