Himachal News: रेणुका बांध के कारण बेघर हुए लोगों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को विस्थापित संघर्ष समिति की एक बड़ी बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में दर्जनों लोगों ने हिस्सा लिया। लंबे इंतजार के बाद 152 बेघर परिवारों की लिस्ट तो मिल गई है, लेकिन इसके साथ लगाई गई शर्तों पर भारी विवाद हो गया है। विस्थापित लोगों ने इन शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि सिस्टम उनके साथ न्याय नहीं कर रहा है।
30 दिन में घर छोड़ने का फरमान नामंजूर
समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने बैठक की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को सरकार और प्रशासन को 20 दिन का समय दिया गया था। कुछ दिन पहले ही एक प्रतिनिधिमंडल शिमला में मुख्यमंत्री से मिला था। इसके बाद यह लिस्ट जारी हुई है। लेकिन बिजली निगम (HPPCL) ने लोगों से एक हलफनामा मांगा है। इस हलफनामे में शर्त नंबर 16 और 7 को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। शर्त के मुताबिक हलफनामा देने के 30 दिन के भीतर लोगों को अपना घर खाली करना होगा। समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक ये शर्तें नहीं हटतीं, कोई भी परिवार हलफनामा जमा नहीं करेगा।
बिजली निगम की जमीनें रहने लायक नहीं
विस्थापित लोगों ने प्रशासन के खिलाफ अपना रुख अब और सख्त कर लिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि निगम जो मकान और जमीनें दे रहा है, वे उन्हें बिल्कुल भी मंजूर नहीं हैं। बिजली निगम ने विस्थापितों के लिए चार अलग-अलग जगहों पर जमीनें तय की हैं। लेकिन लोगों का कहना है कि ये सभी जगहें इंसान के रहने लायक ही नहीं हैं। ज्यादातर बेघर परिवार इन जमीनों को पहले ही ठुकरा चुके हैं।
मृतकों के वारिसों को सीधे मिले ग्रांट
विस्थापित समिति ने सरकार के सामने एक और बहुत अहम मांग रखी है। कई बेघर परिवारों के मुखिया का अब निधन हो चुका है। ऐसे में विस्थापितों ने मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाए। इसके आधार पर घर बनाने की ग्रांट सीधे उनके कानूनी वारिसों को दी जाए। इससे ये बेसहारा परिवार अपना घर बनाकर वहां शांति से रह सकेंगे।


