Rishikesh News: एम्स ऋषिकेश के एक सर्वे में युवाओं की मानसिक स्थिति को लेकर चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। सर्वे में शामिल 47.8 प्रतिशत युवाओं को लगता है कि उनकी बातों और विचारों को महत्व नहीं दिया जाता। 32.5 प्रतिशत युवा सामाजिक समारोहों में असहज महसूस करते हैं। सर्वे में ऋषिकेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 15 से 26 वर्ष आयु वर्ग के 418 युवाओं को शामिल किया गया। यह सर्वे एम्स के सोशल आउटरीच सेल द्वारा किया गया है। डॉ. संतोष ने बताया कि यह डेटा भावनात्मक स्वास्थ्य और शैक्षणिक दबाव को लेकर चिंताजनक है।
चिंता, अवसाद और आत्म-क्षति के बढ़ते मामले
सर्वेमें 23.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बार-बार चिंता या घबराहट अनुभव करने की बात कही। 10.8 प्रतिशत युवा शैक्षणिक अपेक्षाओं के बोझ से दबाव महसूस करते हैं। सबसे चिंताजनक आंकड़ा यह है कि 31.8 प्रतिशत युवाओं ने आत्म-क्षति जैसे विचार आने की जानकारी दी। वहीं 4.3 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उन्हें आत्महत्या करने के विचार भी आए हैं। इसके अलावा 45.7 प्रतिशत युवाओं ने परिवार या करीबी लोगों के साथ बार-बार गलतफहमियों की बात कही, जो भावनात्मक संतुलन की कमी को दर्शाता है। जो युवा लगातार चिंता में रहते हैं, उनमें यह जोखिम लगभग पांच गुना अधिक पाया गया।
डिजिटल तकनीक बन रही बाधा, 12.2 फीसदी के पास नहीं करीबी मित्र
डिजिटल उपयोग एवंबौद्धिक स्वास्थ्य को लेकर किए गए सर्वे में 28.7 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि वे प्रतिदिन चार घंटे से अधिक गैर-शैक्षणिक स्क्रीन समय बिताते हैं। 51.9 प्रतिशत ने माना कि डिजिटल तकनीक उनकी दिनचर्या और पढ़ाई में बाधा डालती है। सर्वे में यह भी पाया गया कि 12.2 प्रतिशत युवाओं के पास कोई करीबी मित्र नहीं है। नेतृत्व एवं समग्र विकास अध्ययन में पाया गया कि 61.2 प्रतिशत युवाओं में जीवन का स्पष्ट उद्देश्य था। 62 प्रतिशत युवा ही पर्याप्त नींद ले पाते हैं और 50.5 प्रतिशत नियमित व्यायाम करते हैं। मात्र 19.6 प्रतिशत युवा ही पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करते हैं।
नेशनल यूथ कान्क्लेव में होगा मंथन
डॉ.संतोष का कहना है कि यह अध्ययन बताता है कि युवाओं की समस्याओं को अलग-अलग देखने की बजाय समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। इन चुनौतियों पर चर्चा करने और समाधान खोजने के लिए 25 मार्च को एम्स ऋषिकेश में नेशनल यूथ कान्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में विशेषज्ञों, शिक्षकों और युवाओं को एक साथ लाकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह कान्क्लेव युवाओं के बीच बढ़ती चिंता, अवसाद और आत्म-क्षति की प्रवृत्ति को समझने और रोकथाम के उपायों पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे।


