Assam News: पूर्वोत्तर भारत की समृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच सीमा क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन को तेजी से सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) हुआ है।
इस हाई-प्रोफाइल समझौते के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहे। इनके अलावा असम के मुख्यमंत्री डॉक्टर हिमंत बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने इस कदम को मील का पत्थर बताया।
पूर्वोत्तर में खुलेगा निवेश और समृद्धि का नया आर्थिक गलियारा
इस खास मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए गेम चेंजर साबित होगा। यह रणनीतिक कदम क्षेत्र में भारी निवेश, नई नौकरियां और समृद्धि का एक बड़ा आर्थिक गलियारा खोलेगा। इससे स्थानीय युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
गृहमंत्री ने आगे कहा कि यह अहम समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समृद्ध और आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर के विजन को मजबूती से साकार करेगा। नागालैंड में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और मूल्यवान खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। इनका सही दोहन भारत की विदेशों पर निर्भरता कम करेगा।
वर्तमान समय में इस क्षेत्र में प्रतिदिन केवल 1,000 से 1,500 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस नई पहल से उत्पादन क्षमता को 10 गुना से अधिक बढ़ाया जा सकता है। इससे घरेलू तेल कंपनियों को काम करने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
पूरे नागालैंड राज्य में तेल अन्वेषण की मिली मंजूरी
अमित शाह ने बताया कि नागालैंड सरकार ने केवल छह चिन्हित क्षेत्रों तक सीमित न रहकर अब पूरे राज्य में तेल अन्वेषण (ऑयल एक्सप्लोरेशन) की खुली अनुमति दे दी है। असम सरकार ने भी इस बेहतरीन पहल का पूरी तरह समर्थन और स्वागत किया है।
दोनों राज्यों के इस आपसी सहयोग से सभी पक्षों को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। यह ऐतिहासिक कदम सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज्म) का एक बेहतरीन उदाहरण है। राष्ट्रीय संपदा के सही उपयोग के लिए दो पड़ोसी राज्यों ने आपसी तालमेल और सौहार्द का रास्ता चुना है।
गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के सर्वांगीण विकास को हमेशा अपनी शीर्ष प्राथमिकता सूची में रखा है। साल 2019 के बाद से हुए 12 महत्वपूर्ण शांति समझौतों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में स्थाई शांति और सुरक्षा स्थापित की गई है।
हिंसा में अस्सी प्रतिशत की कमी और अफस्पा हटाने की तैयारी
सफल सरकारी नीतियों के चलते पूर्वोत्तर में हिंसक वारदातों में लगभग 80 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इसी शानदार माहौल का सुखद परिणाम है कि आज पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र ग्लोबल टूरिज्म, बड़े औद्योगिक निवेश और नई व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।
गृहमंत्री ने जानकारी दी कि पूर्वोत्तर के लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से से विवादित सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) पूरी तरह हटाया जा चुका है। सरकार को उम्मीद है कि अगले साल तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे क्षेत्र को मुक्त कर दिया जाएगा।
यह दूरदर्शी समझौता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के बड़े लक्ष्यों को आसानी से पूरा करेगा। इससे तेल और गैस उत्पादन गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित, स्थिर और अनुकूल वातावरण मिलेगा। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
Author: Deepak Baruah


