Tiruchirappalli News: आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ‘सेव सॉइल-कावेरी कॉलिंग’ अभियान के तहत तमिलनाडु में एक बड़ा ऐतिहासिक महासम्मेलन आयोजित किया गया। तिरुचिरापल्ली के एसआरएम यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में 6 हजार से अधिक प्रगतिशील किसानों और आम लोगों ने हिस्सा लिया।
इस सम्मेलन के साथ ही एक भव्य दक्षिण भारतीय फल महोत्सव प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जैविक फूड फॉरेस्ट और पेड़ों पर आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना था। इस अभियान को लेकर स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों में भारी उत्साह देखने को मिला।
खेती का नाम बदलने पर सरकार की बड़ी मुहर
कावेरी कॉलिंग अभियान के मुख्य संचालक तमिलमारन ने कहा कि इस आंदोलन से किसानों में चेतना जागी है। अब खेतों के लिए पौधों की मांग नर्सरी में तेजी से बढ़ रही है। यह अनूठा मॉडल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता, पानी को रोकने की ताकत और नदी की सेहत सुधारता है।
हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा फैसला लिया है। आंदोलन के अनुरोध पर उन्होंने आधिकारिक रूप से ‘एग्रोफॉरेस्ट्री’ का नाम बदलकर ‘पेड़ों पर आधारित खेती’ करने का ऐलान किया है। यह फैसला नीति-निर्माताओं के बीच इस खेती की स्वीकार्यता को साफ दर्शाता है।
डायबिटीज मरीजों के लिए तैयार हुई विशेष ‘कावेरी’ किस्म
नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना के डायरेक्टर डॉक्टर सेल्वराजन ने रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रसायनों से हमारी उपजाऊ मिट्टी खराब हुई है। इससे निपटने के लिए संस्थान ने सुक्रोज-फ्री केले की एक नई विशेष किस्म ‘कावेरी’ विकसित की है।
यह अनोखी किस्म डायबिटीज के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए अमृत समान मानी जा रही है। इसके अलावा नारियल के बागानों में बहुपरतीय खेती यानी फूड फॉरेस्ट मॉडल अपनाने की सलाह दी गई। इस वैज्ञानिक तरीके से जमीन का सही उपयोग होता है और मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन तेजी से बढ़ता है।
यूनाइटेड नेशंस से मिला भारतीय किसान को बड़ा सम्मान
संयुक्त राष्ट्र से प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले विख्यात भारतीय किसान वल्लुवन ने भी इस मंच पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले वे सिर्फ पारंपरिक नारियल की खेती करते थे और उन्हें सद्गुरु के इस नए वैज्ञानिक कॉन्सेप्ट पर बिल्कुल भरोसा नहीं था।
सद्गुरु की अनूठी देखरेख में अब वे अपने एक ही खेत में नारियल के साथ आम, कटहल, केला, चीकू, जायफल और काली मिर्च सहित 14 फसलें उगा रहे हैं। उन्होंने भावुक होकर कोयंबटूर के एक साधारण किसान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए ईशा फाउंडेशन का आभार जताया।
‘मैंगो मैन’ कलीम उल्लाह खान बने मुख्य आकर्षण
इस महासम्मेलन में आईसीएआर और निफ्टम तंजावुर के वैज्ञानिकों ने फल उत्पादों में वैल्यू एडिशन की नई टेक्नोलॉजी सिखाई। कार्यक्रम में देश के मशहूर ‘मैंगो मैन’ पद्मश्री कलीम उल्लाह खान की उपस्थिति सबसे विशेष रही। उन्होंने एक ही पेड़ पर आम की 300 से अधिक किस्में उगाई हैं।
इस भव्य प्रदर्शनी में केले की 60 और आम-कटहल की 100 से अधिक अनूठी किस्में प्रदर्शित की गईं। कृषि विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर हरिदास ने कटहल की खूबियों की जानकारी दी। मौके पर किसानों को बेहद कम और सब्सिडी दरों पर उन्नत फलदार पौधे भी बांटे गए।
Author: Karthik Srinivasan


