India News: देशभर में शनिवार, 30 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ। फिर भी वाहन चालकों को राहत नहीं मिली है। पिछले दिनों हुई लगातार बढ़ोतरी ने ईंधन को फिर महंगा बना दिया है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।
सरकारी तेल कंपनियों ने आज कीमतों को स्थिर रखा है। इसके बावजूद आम लोगों की जेब पर दबाव साफ दिख रहा है। 25 मई को पेट्रोल और डीजल में 2.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। यह दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी बड़ी बढ़ोतरी थी।
दो हफ्तों में करीब साढ़े सात रुपये महंगा ईंधन
15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इस उछाल ने घरेलू बजट, रोजाना यात्रा और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित किया है। सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर दिख रहा है, जो रोज वाहन से लंबी दूरी तय करते हैं।
ईंधन के दाम अब मई 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे पहले मार्च 2024 में लोकसभा चुनावों से पहले पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती हुई थी। उसके बाद लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहीं, लेकिन मई में तस्वीर बदल गई।
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल का भाव 111.18 रुपये के आसपास है। कोलकाता में कीमत 113 रुपये से ऊपर है। चेन्नई में भी पेट्रोल 107 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है। कई बड़े शहरों में पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर बना हुआ है।
डीजल के दाम भी कई शहरों में ऊंचे
डीजल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। दिल्ली में डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में यह 97.83 रुपये के आसपास है। कोलकाता में डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में भी डीजल महंगा बना हुआ है।
ईंधन के दाम शहरों के हिसाब से अलग रहते हैं। इसकी वजह राज्य सरकारों के टैक्स, वैट, ढुलाई खर्च और स्थानीय शुल्क हैं। इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में कीमतें समान नहीं दिखतीं। छोटे शहरों में भी दरें अलग हो सकती हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को स्थानीय रेट चेक करना चाहिए।
हैदराबाद में पेट्रोल 115 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है। तिरुवनंतपुरम में भी कीमत इसी स्तर के पास है। जयपुर में पेट्रोल 112 रुपये से ऊपर है। लखनऊ में पेट्रोल 102 रुपये के आसपास है। गुरुग्राम, नोएडा और पटना में भी कीमतों में मामूली बदलाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल और पश्चिम एशिया तनाव का असर
तेल कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव बड़ा कारण बताया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से आयात लागत बढ़ती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक बाजार की हलचल सीधे घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर असर डालती है।
पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़ी परिस्थितियों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार का अहम केंद्र है। यहां किसी भी तरह की बाधा से क्रूड ऑयल महंगा होता है। भारत जैसे आयातक देशों पर इसका असर जल्दी दिखने लगता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आपूर्ति में इन देशों की बड़ी भूमिका है। जब वहां तनाव बढ़ता है, तो जहाजों की आवाजाही, बीमा लागत और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ जाता है। इसका असर उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
आम लोगों के बजट पर सीधा दबाव
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सिर्फ वाहन चलाने का खर्च नहीं बढ़ता। इसका असर सब्जी, फल, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामान पर भी पड़ सकता है। माल ढुलाई महंगी होने पर कारोबारी लागत बढ़ती है। कई बार यह बोझ धीरे-धीरे आम ग्राहकों पर डाल दिया जाता है।
डीजल के दाम कृषि और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए ज्यादा अहम हैं। ट्रक, बस, ट्रैक्टर और कई मशीनें डीजल पर निर्भर करती हैं। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है। इसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में महसूस किया जाता है।
बाइक और कार चलाने वाले लोगों के लिए भी मासिक खर्च बढ़ गया है। जिन परिवारों में रोज ऑफिस, दुकान या स्कूल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, उनकी बचत पर असर पड़ता है। ईंधन महंगा होने से कैब, ऑटो और डिलीवरी सेवाओं का किराया भी बढ़ सकता है।
तेल कंपनियां रोज सुबह अपडेट करती हैं रेट
भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम रोज सुबह 6 बजे अपडेट होते हैं। सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागतों को देखकर दरें तय करती हैं। इसलिए कई शहरों में छोटी बढ़ोतरी या कमी रोजाना देखने को मिल सकती है।
उपभोक्ता अपने शहर का ताजा भाव तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या एसएमएस सेवा से देख सकते हैं। पेट्रोल पंप पर भी रोजाना नई दरें दिखाई जाती हैं। लंबे सफर से पहले रेट चेक करना बेहतर रहता है, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में कीमतों का अंतर ज्यादा हो सकता है।
फिलहाल 30 मई को बड़ी राहत या नई बढ़ोतरी नहीं दिखी है। लेकिन बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे कीमतें कच्चे तेल और वैश्विक तनाव पर निर्भर करेंगी। अगर क्रूड ऑयल महंगा बना रहा, तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को फिर झटका लग सकता है।
Author: Rajesh Kumar

