West Bengal News: पश्चिम बंगाल में तख्तापलट होते ही एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अवैध घुसपैठियों ने वापस भागना शुरू कर दिया है। सालों से यहां रह रहे विदेशी नागरिक अब अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बांग्लादेश लौट रहे हैं।
बंगाल की धरती पर लंबे समय से घुसपैठियों का राज चल रहा था। लेकिन नई सरकार आते ही अब प्रशासन सख्त एक्शन मोड में आ गया है। जो विदेशी नागरिक आसानी से वापस जाने को तैयार नहीं हैं, उनके लिए राज्य में कई कड़े होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं।
इस नई प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अब अवैध रूप से रह रहे लोगों के मन में कानून का भारी डर बैठ गया है। पिछले पंद्रह वर्षों से इसी राज्य का पुलिस तंत्र इन घुसपैठियों के खिलाफ कोई बड़ी जमीन कार्रवाई करने से लगातार बचता नजर आ रहा था।
अग्निमित्रा पॉल ने तुष्टीकरण की राजनीति पर उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में पूर्व शासक वर्ग बहुसंख्यक जनता को भयमुक्त रखने के बजाय लगातार डराने का काम कर रहा था।
अग्निमित्रा पॉल के मुताबिक पूर्ववर्ती सरकार वोट बैंक के लालच में बाहरी लोगों को सरकारी दस्तावेज बांट रही थी। घुसपैठियों को अवैध तरीके से सरकारी राशन कार्ड और दूसरी जरूरी मूलभूत सुविधाएं दी जा रही थीं। यह बहुसंख्यक समाज की राजनीतिक आवाज को दबाने की सोची-समझी कोशिश थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये विदेशी नागरिक एक खास राजनीतिक दल के लिए एकमुश्त वोट बैंक बन चुके थे। पूर्ववर्ती शासन में साल २०१३ से लेकर २०२५ के बीच कैनिंग, धुलागढ़, बीरभूम और मुर्शिदाबाद में बहुसंख्यक समाज को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हिंसक वारदातें हुईं।
इन सांप्रदायिक हिंसाओं के दौरान बहुसंख्यकों के घरों और दुकानों को बाकायदा चिन्हित करके आग के हवाले किया गया। साल २०२५ में मुर्शिदाबाद के धुलियन और सूती जैसे इलाकों में भड़की भयानक हिंसा के डर से चार सौ से ज्यादा हिंदू परिवारों को पलायन करना पड़ा था।
ममता मॉडल बनाम शुभेंदु मॉडल का साफ दिखने लगा असर
पूर्व सरकार के राज में बहुसंख्यक समाज को अपने पारंपरिक त्योहार मनाने के लिए भी बार-बार कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। मुहर्रम के नाम पर साल २०१६ और २०१७ में विजयादशमी के पावन विसर्जन कार्यक्रमों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी।
इसके अलावा रामनवमी और हनुमान जयंती के जुलूसों के मार्ग को भी बेहद सीमित किया गया था। साल २०२४ में तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद रामनवमी पर हिंसा होने की खुली चेतावनी दी थी। हालांकि नई सरकार आने के बाद अब कानून व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है।
वर्तमान सरकार ने राज्य के ११ संवेदनशील जिलों में बड़े होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन विशेष सेंटरों में फिलहाल ३८६ बांग्लादेशी घुसपैठियों को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। इसमें सबसे ज्यादा ३३५ घुसपैठिए अकेले बसीरहाट के होल्डिंग सेंटर में बंद हैं।
शुभेंदु मॉडल के तहत पुलिस अब पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम कर रही है। सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर फेंसिंग लगाने के लिए तुरंत जमीन दे दी गई है। साल २०२१ के चुनाव के बाद जहां भीषण खूनी हिंसा हुई थी, वहीं २०२६ के चुनाव के बाद बंगाल पूरी तरह शांत है।
Author: Sourav Banerjee

