‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर RSS की पहली बड़ी प्रतिक्रिया, सुनील आंबेकर ने Gen Z और लोकतंत्र को लेकर कही अहम बात

Delhi News: सोशल मीडिया पर चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र हर तरह की आवाज और विचार को जगह देता है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश के युवा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखते हैं।

सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है। यहां नियमित और पारदर्शी चुनाव होते हैं। मीडिया स्वतंत्र है और सोशल मीडिया के जरिए लोग अपने विचार खुलकर रखते हैं। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

लोकतंत्र में हर आवाज को मिलती जगह

आरएसएस नेता ने कहा कि किसी भी नए विचार या बहस को झटके की तरह नहीं देखना चाहिए। लोकतंत्र में विभिन्न मत सामने आते हैं और लोग उन्हें व्यक्त भी करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की संस्थाएं मजबूत हैं और लोकतांत्रिक ढांचा ऐसे विचारों को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।

आंबेकर के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके नागरिक और लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था में हर वर्ग की भावनाओं और विचारों को समाहित करने की क्षमता है। लोगों को लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और संघ का भी इसी व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।

Gen Z को लेकर कही महत्वपूर्ण बात

सुनील आंबेकर ने देश के युवाओं, खासकर Gen Z पीढ़ी को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज का युवा बेहद आशावादी है। उसे भारत के भविष्य पर भरोसा है। युवा संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर अपनी बात रखते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समय-समय पर कई मुद्दे उठते हैं। इन मुद्दों के समाधान के लिए भी लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं। युवाओं की भागीदारी लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है। यही वजह है कि नई पीढ़ी की अभिव्यक्ति को सकारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान पर संघ का पुराना रुख

पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर आंबेकर ने आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघ हमेशा मानता रहा है कि लोगों के बीच संवाद बना रहना चाहिए। बातचीत कई बार ऐसे रास्ते खोलती है, जिनसे समस्याओं का समाधान संभव होता है।

आंबेकर ने स्पष्ट किया कि सरकारों के बीच औपचारिक बातचीत करना राजनीतिक और कूटनीतिक विषय है। हालांकि उन्होंने कहा कि जब आधिकारिक स्तर पर संवाद आगे नहीं बढ़ता, तब भी लोगों के बीच संपर्क और संवाद जारी रहना चाहिए। इससे संबंधों में पूरी तरह दूरी नहीं आती।

उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अब भी सीमित स्तर पर संपर्क और व्यापार जारी है। ऐसे संवाद और संबंधों को बनाए रखना उपयोगी हो सकता है। उनका मानना है कि लगातार संपर्क रहने से कुछ मुद्दों पर धीरे-धीरे सकारात्मक प्रगति की संभावना बनती है।

विभाजन को लेकर भी दोहराया रुख

आरएसएस प्रचार प्रमुख ने भारत के विभाजन के मुद्दे पर भी संगठन का पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा देश के विभाजन का विरोध किया था। उनके अनुसार यदि उस समय संगठन अधिक मजबूत स्थिति में होता, तो देश के बंटवारे की परिस्थितियां शायद अलग हो सकती थीं।

आंबेकर ने कहा कि संघ का मूल विचार समाज को जोड़ने और संवाद को बढ़ावा देने का रहा है। इसी सोच के तहत संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, सामाजिक संवाद और राष्ट्रीय एकता को महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र ही विविध विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ सकता है।

Author: Harikarishan Sharma

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