युद्ध के बीच भारत का बड़ा समुद्री ऑपरेशन, होर्मुज से निकले तेल जहाज; जानिए कैसे बची सप्लाई चेन

Iran News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बावजूद भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने कई महत्वपूर्ण जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है। जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति से जुड़े जहाजों को प्राथमिकता दी गई। पूरी प्रक्रिया में विदेश मंत्रालय की भी अहम भूमिका रही।

हालांकि क्षेत्र में संघर्ष विराम लागू है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही अब भी जोखिम भरी मानी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद और अन्य जरूरी सामान लेकर आने वाले जहाजों का सुरक्षित संचालन बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विदेश मंत्रालय निभाता है अहम भूमिका

जहाजरानी मंत्रालय में शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में बताया कि ईरान के साथ समन्वय की पूरी प्रक्रिया सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस काम में विदेश मंत्रालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है और वही कई स्तरों पर संवाद स्थापित करता है।

उन्होंने बताया कि जहाजों को प्राथमिकता देने का फैसला पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा उर्वरक मंत्रालय के साथ समन्वय करके लिया जाता है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद संबंधित जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित बाहर निकालने की रणनीति तैयार की जाती है।

होर्मुज में मौजूद हैं 13 भारतीय जहाज

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में 13 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं। इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल है। इन सभी पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

जहाजों की लोकेशन और गतिविधियों से जुड़े सार्वजनिक डेटा को लेकर पूछे गए सवाल पर शर्मा ने कहा कि इस विषय पर स्पष्ट टिप्पणी करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी का उपयोग कोई भी व्यक्ति या संगठन अपनी मंशा के अनुसार कर सकता है।

संघर्ष के बीच प्रभावित हुआ समुद्री मार्ग

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में गिना जाता है। इसके बावजूद भारत ने अपने जहाजों की आवाजाही बनाए रखी और कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिलाने में सफलता हासिल की।

मंत्रालय के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद भारत के कई जहाज अन्य देशों की तुलना में अधिक संख्या में इस क्षेत्र से बाहर निकले हैं। इनमें शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर, बीडब्ल्यू एल्म और ग्रीन सान्वी जैसे जहाज शामिल हैं, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यात्रा पूरी की।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में जारी अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। इसी कारण भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक आयात को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय बढ़ा रहा है।

Author: Pallavi Sharma

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