मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद दिल्ली पहुंचे सिद्धारमैया, राहुल गांधी से मुलाकात से पहले राज्यसभा सीट का ऑफर ठुकराकर मचाई सियासी हलचल

Karnataka News: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद भी राज्य की सियासी हलचलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। राजनीतिक पंडितों की नजरें वहां के घटनाक्रम पर लगातार बनी हुई हैं। इस्तीफा सौंपने के बाद पूर्व सीएम सिद्धारमैया सीधे दिल्ली पहुंच चुके हैं।

आज शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात होनी है। इस मुलाकात से पहले ही सिद्धारमैया ने एक बड़ा दावा कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक की राज्य की राजनीति में ही पूरी तरह सक्रिय रहेंगे।

इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने पार्टी आलाकमान की ओर से दिए गए राज्यसभा सीट के बड़े ऑफर को ठुकरा दिया है। उनके इस नए दावे के बाद कांग्रेस के अंदरूनी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

राष्ट्रीय राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं: सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने कल गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के राज्यसभा जाने के प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह वरुणा विधानसभा क्षेत्र से विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

वरुणा क्षेत्र के लोगों ने उन्हें पांच साल के लिए अपना प्रतिनिधि चुना है। उनके इस कार्यकाल के कम से कम दो साल अभी बाकी हैं। वह इन बचे हुए सालों में राज्य की राजनीति में ही बने रहेंगे। वह अपने क्षेत्र की जनता की सेवा करते रहेंगे।

देर रात दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचने पर जब पत्रकारों ने उनसे राज्यसभा सीट को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। वह चुपचाप मुस्कुराते हुए आगे निकल गए। हालांकि वह पहले ही राष्ट्रीय राजनीति में जाने की इच्छा से इनकार कर चुके थे।

सत्ता हस्तांतरण के बाद कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ा राजनीतिक सस्पेंस

सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में कहा था कि पार्टी आलाकमान ने मुझसे दिल्ली आने और राज्यसभा जाने को कहा था। लेकिन मैंने उन्हें साफ मना कर दिया है। फिलहाल मेरी राष्ट्रीय राजनीति या दिल्ली के सियासी गलियारों में काम करने की कोई दिलचस्पी नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस में जिस सत्ता हस्तांतरण को बेहद आसानी से किया जाना था, वह अब उलझ गया है। सिद्धारमैया के पद छोड़ने के तरीके ने राज्य इकाई के भीतर एक अधिक जटिल और सस्पेंस वाली राजनीतिक परिस्थिति पैदा कर दी है।

सिद्धारमैया ने भले ही अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी हो, लेकिन कर्नाटक की सियासत में उनका दबदबा और असर पहले की तरह मजबूत बना हुआ है। बेंगलुरु के राजभवन में राज्यपाल के विशेष सचिव को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपने के बाद उन्होंने अपनी योजनाएं बताई थीं।

सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ राज्य में जारी रहेगा संघर्ष

पूर्व सीएम ने पत्रकारों से कहा था कि लोगों ने मुझे 5 साल के लिए भारी मतों से विधायक बनाया है। मेरे कार्यकाल के दो साल अभी बाकी हैं। तब तक मैं कर्नाटक के विकास और अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए काम करता रहूंगा।

मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद अपनी भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि वह जमीनी राजनीति में सक्रिय रहकर सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपना वैचारिक संघर्ष हमेशा जारी रखेंगे। वह पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं।

इस्तीफे के पीछे की असली वजह पर उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही अपनी बात पर कायम थे। जब भी हाईकमान कहेगा, वह पद छोड़ देंगे। शीर्ष नेतृत्व के किसी भी दबाव के सवाल को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से तुरंत अपना इस्तीफा सौंपा है।

Author: Harikarishan Sharma

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