Delhi News: देश के शहरी युवाओं में लंबी दूरी की बाइक राइडिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। अब मोटरसाइकिल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि एडवेंचर का जरिया बन चुकी है। छुट्टी मिलते ही युवा किसी कैफे या मॉल जाने के बजाय उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों की कठिन सड़कों की तरफ निकल रहे हैं।
सोलो और ग्रुप राइडिंग के जरिए नए डेस्टिनेशन की खोज
आजकल के बाइकर्स अकेले यानी सोलो राइडिंग के जरिए खुद को समय देना पसंद करते हैं। वहीं कई युवा पांच से दस बाइकों का पूरा ग्रुप बनाकर हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इन राइडर्स के लिए असली रोमांच मंजिल पर पहुंचने से ज्यादा रास्ते में मिलने वाले नए अनुभवों और चुनौतियों का सामना करने में है।
लंबी दूरी के सफर के लिए विशेष रूप से तैयार होती हैं बाइकें
राइडर्स लंबी यात्राओं के लिए सामान्य मोटरसाइकिलों के बजाय एडवेंचर और टूरिंग सेगमेंट की भारी गाड़ियों को प्राथमिकता देते हैं। ट्रिप पर निकलने से पहले इंजन, टायर, ब्रेक की गहन जांच की जाती है। गाड़ी पर लगेज कैरियर, मोबाइल होल्डर, जरूरी टूल किट और सुरक्षात्मक सामान मजबूती से सेट किए जाते हैं।
सुरक्षित सफर के लिए आधुनिक सेफ्टी गियर्स का बढ़ रहा चलन
एडवेंचर के बढ़ते शौक के बीच युवा अब सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर हो चुके हैं। सफर के दौरान प्रामाणिक हेलमेट, राइडिंग जैकेट, ग्लव्स, मजबूत शूज और मेडिकल किट अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। रात में गाड़ी चलाने से बचना, लाइव लोकेशन शेयर करना और थकान होने पर पर्याप्त आराम करना अब राइडिंग अनुशासन का मुख्य हिस्सा है।
सोशल मीडिया के जरिए मजबूत हो रही है राइडर्स कम्युनिटी
बाइकर्स अपने यात्रा अनुभवों, खूबसूरत रास्तों और तैयारियों के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार शेयर कर रहे हैं। इन व्लॉग्स और रील्स को डिजिटल दुनिया में बेहद पसंद किया जा रहा है। इंटरनेट के इस दौर ने देश में एक मजबूत राइडिंग कम्युनिटी खड़ी कर दी है, जिससे नए युवाओं को रूट और सुरक्षा टिप्स मिलते हैं।
एक सामान्य लंबी पहाड़ी यात्रा का पूरा खर्च दूरी और जगह के आधार पर तय होता है। राइडर्स के मुताबिक पेट्रोल, बजट होटल में रुकने और स्थानीय खान-पान को मिलाकर करीब 10 हजार से 30 हजार रुपये का बजट बनता है। अनुभवी राइडर्स हमेशा एक्स्ट्रा कैश, जरूरी दस्तावेज, पावर बैंक और एक्स्ट्रा चाबी का सेट अपने बैकअप में साथ रखते हैं।

