Uttarakhand News: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए विदेश मंत्रालय ने जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वैध वीजा और चीन के जरूरी प्रवेश परमिट के बिना यात्रा शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। अधूरे दस्तावेजों के कारण कई तीर्थयात्री नेपाल में फंस गए हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जब तक यात्रा के लिए सभी आवश्यक ट्रैवल दस्तावेज और परमिट हाथ में न हों, तब तक भारत से अपनी यात्रा न शुरू करें। केवल इस भरोसे पर निकलना कि दस्तावेज आगे मिल जाएंगे, गंभीर परेशानी खड़ी कर सकता है। इसलिए पूरी तैयारी और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही आगे बढ़ें।
अधिकृत टूर ऑपरेटरों के साथ ही करें यात्रा
मंत्रालय ने यात्रियों को केवल अधिकृत और पंजीकृत टूर ऑपरेटरों के माध्यम से ही यात्रा बुक करने की सलाह दी है। निजी या अनधिकृत ऑपरेटरों के भरोसे रहने पर दस्तावेजों की व्यवस्था में दिक्कतें आ सकती हैं। सही ऑपरेटर का चयन ही आपकी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चीन में भारतीय राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने भी तीर्थयात्रियों के लिए विशेष संदेश जारी किया है। दूतावास की टीम ने परिक्रमा मार्ग, होटल, रसोई और चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धार्मिक कैलेंडर के कारण कैलाश क्षेत्र में स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहेगी, इसलिए यात्रियों को अधिक धैर्य रखने की जरूरत होगी।
उत्तराखंड मार्ग से 4 जुलाई को रवानगी
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होने वाली यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पहला जत्था 4 जुलाई को प्रदेश में पहुंचेगा। इस बार लिपुलेख मार्ग से 50-50 लोगों के कुल 10 जत्थे यात्रा करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर यह है कि उन्हें केवल 38 किलोमीटर पैदल चलना होगा और बाकी सफर वाहनों से तय किया जाएगा।
यह यात्रा पहले की तुलना में अधिक सरल और आरामदायक हो गई है। फिर भी, विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि कैलाश मानसरोवर जैसी संवेदनशील यात्रा पर निकलने से पहले सभी आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। अधिकृत माध्यमों से यात्रा करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। यात्रियों को अपनी सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

