France Heatwave Update: फ्रांस में भीषण गर्मी और हीटवेव का तांडव, जानिए भारत के मुकाबले क्यों हो रही इतनी मौतें

- Advertisement -

Global News: यूरोपीय देश फ्रांस इन दिनों अभूतपूर्व वैश्विक जलवायु परिवर्तन और भीषण हीटवेव की मार झेल रहा है। हमेशा ठंडे या सामान्य मौसम के लिए मशहूर इस देश में अब तक हजारों लोग भीषण गर्मी के कारण दम तोड़ चुके हैं। अचानक बदले इस मिजाज ने वहां की पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फ्रांस का वार्षिक औसत तापमान अमूमन 12 से 14 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है। इसके विपरीत भारत का औसत तापमान हमेशा 24 से 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज होता है। भारत में जहां लोग कड़ी धूप और उच्च तापमान के अभ्यस्त हैं, वहीं फ्रांसीसी नागरिक इसके आदी नहीं हैं।

- Advertisement -

भारत में 45 डिग्री सामान्य पर फ्रांस में 40 डिग्री क्यों है जानलेवा

भारत के कई मैदानी शहरों में गर्मियों के दिनों में पारा 45 डिग्री के पार जाना सामान्य बात है। इसके बावजूद हमारे देश में जनजीवन इस तरह प्रभावित नहीं होता है। फ्रांस में पहली बार रिकॉर्ड 40 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज होते ही लोगों की मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगा है।

इस अप्रत्याशित संकट के कारण फ्रांस के बाजारों में एयर कंडीशनर खरीदने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। वहां ठंडी जलवायु होने के कारण घरों में एसी की जरूरत कभी महसूस नहीं की गई थी। ज्यादातर यूरोपीय घरों में भीषण ठंड से बचने के लिए केवल रूम हीटर का ही इस्तेमाल होता आया है।

कड़े कानून और बुनियादी ढांचा बना मुसीबत का मुख्य कारण

यूरोपीय देशों में कड़े नागरिक नियमों के कारण कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से आसानी से एसी नहीं लगवा सकता। यदि किसी को विशेष अनुमति मिल भी जाए, तो वहां एसी लगवाने का खर्च बहुत ज्यादा होता है। इस वजह से आम कामकाजी लोग चाहकर भी तुरंत राहत नहीं पा पा रहे हैं।

इस अभूतपूर्व गर्मी ने फ्रांस की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी पूरी तरह ठप कर दिया है। सड़कों का डामर या तारकोल पिघलने लगा है, जिससे वाहनों का चलना दूभर हो गया है। अत्यधिक तापमान के कारण शहरों में चलने वाली ट्राम की रेल पटरियां भी अपना मूल आकार बदल रही हैं।

जानिए भारतीय और यूरोपीय बुनियादी ढांचे में क्या है बड़ा अंतर

भारत में सड़कें और रेल पटरियां बनाते समय स्थानीय मौसम के अधिकतम और न्यूनतम स्तर का पूरा ध्यान रखा जाता है। हमारे देश का बुनियादी ढांचा 50 डिग्री तक की भीषण गर्मी आसानी से झेल सकता है। इसके विपरीत फ्रांस का इंफ्रास्ट्रक्चर केवल कड़ाके की ठंड और बर्फबारी झेलने के लिए ही बनाया गया है।

जलवायु के मामले में भारत में बहुत विविधता पाई जाती है। यहां एक तरफ अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्र हैं तो दूसरी तरफ थार जैसा तपता मरुस्थल भी मौजूद है। भारतीय निर्माण इंजीनियर पहले से ही इन चरम मौसमी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर हर परियोजना का खाका तैयार करते हैं।

इंसुलेटेड घर और खानपान की आदतें भी बढ़ा रही हैं परेशानी

भारत में घर बनाते समय क्रॉस वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके उलट यूरोप के घर इंसुलेटेड होते हैं, जो अंदर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देते। इसके कारण वहां घर बहुत जल्दी गर्म तो हो रहे हैं, लेकिन उन्हें ठंडा करना नामुमकिन हो रहा है।

यूरोपीय लोगों की शारीरिक त्वचा भी पतली होती है, जो तेज धूप और गर्मी सहन नहीं कर पाती। इसके अलावा वे गर्मियों में भी भारी और वसायुक्त भोजन का सेवन जारी रखते हैं। वहीं भारतीय लोग मौसम के अनुसार पानी वाले फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन खाकर खुद को सुरक्षित रखते हैं।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles