Uttarakhand News: गंगोत्री घाटी में मंडराया आपदा का खतरा, हर्षिल में भागीरथी नदी के कटाव से सहमे लोग

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Uttarakhand News: उत्तराखंड में मॉनसून आने से पहले ही गंगोत्री घाटी का हर्षिल क्षेत्र बड़े खतरे की जद में आ गया है। भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने और अपना बहाव बदलने के कारण स्थानीय लोगों में भारी दहशत है। नदी किनारे सुरक्षा के लिए बनाया गया मलबे का टीला बह जाने से अब पानी सीधे आवासीय बस्ती की ओर मुड़ गया है।

बीते साल की आपदा की यादें ताजा

स्थानीय निवासी पिछले साल अगस्त महीने में आई विनाशकारी आपदा को आज भी नहीं भूले हैं। धराली गांव में बादल फटने के कारण खीर गंगा नदी ने विकराल रूप ले लिया था, जिसमें कई घर तबाह हो गए थे और दर्जनों लोगों की जान गई थी। उस घटना के बाद से ही घाटी के लोग अब हर छोटी बारिश से कांप उठते हैं।

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इस बार भागीरथी नदी का रुख बदलने से थाना भवन, सेना कैंप और सेब के कई बगीचे खतरे की चपेट में आ गए हैं। गेस्ट हाउस का एक टिनशेड पहले ही नदी की भेंट चढ़ चुका है। नदी किनारे हो रहे इस तीव्र भू-कटाव के कारण बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़कर गिर रहे हैं, जिससे वहां मौजूद इमारतों की नींव कमजोर हो रही है।

प्रशासन और विभाग पर लापरवाही का आरोप

हर्षिल की ग्राम प्रधान सुचित रौतेला और स्थानीय निवासी जयवीर नेगी ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आपदा को ग्यारह महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी उस झील को पूरी तरह से नहीं खोला गया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने नदी को चैनलाइज करने के नाम पर केवल मिट्टी का टीला बनाया था।

विभाग द्वारा बनाया गया वह अस्थाई टीला शुक्रवार को बढ़ते जलस्तर के साथ ही बह गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से अब नदी का पूरा बहाव सीधे गांवों और रिहायशी इलाकों की तरफ हो गया है। स्थानीय जनता समय रहते स्थायी सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रही है, ताकि किसी बड़े नुकसान को होने से रोका जा सके।

डीएम ने दिए सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश

हालात की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभाग की टीम को तुरंत हर्षिल भेजा। रविवार को टीम ने मौके का मुआयना कर नुकसान का आकलन किया। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल ने बताया कि क्षेत्र में दस करोड़ की लागत से आरसीसी सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है।

उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा कार्यों को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की गति काफी धीमी है और मॉनसून की पहली बारिश ही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। प्रशासन अब इन सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने की बात कह रहा है ताकि लोगों की जान-माल की रक्षा हो सके।

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