New Delhi News: भारत में 10 मिनट में डिलीवरी का जो ट्रेंड जोमेटो और स्विगी ने शुरू किया था, उसमें अब बड़ा बदलाव आ रहा है। ग्लोबल ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट भी इस रेस में उतर चुकी हैं। इस तगड़े कॉम्पिटिशन के कारण जोमेटो और स्विगी के मार्केट वैल्यू में 15 बिलियन डॉलर (1.41 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की भारी गिरावट आई है।
शेयर मार्केट में जोमेटो के शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से 28 फीसदी तक टूट चुके हैं। वहीं, उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी के शेयरों में अपने हालिया पीक से करीब 47 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इन्वेस्टर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर घबराहट देखी जा रही है, जिससे दोनों कंपनियों को शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट में बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
अमेजन और फ्लिपकार्ट ने छोटे शहरों में बिछाया डार्क स्टोर्स का जाल
अमेजन और फ्लिपकार्ट भारत के तेजी से बढ़ते 11 बिलियन डॉलर के क्विक-कॉमर्स सेगमेंट पर पूरा फोकस कर रही हैं। फ्लिपकार्ट मिनट्स ने महज दो साल में 130 शहरों तक पहुंच बनाने के लिए 1,000 से ज्यादा डार्क स्टोर्स (लास्ट-माइल वेयरहाउस) का नेटवर्क तैयार कर लिया है। कंपनी आने वाले कुछ महीनों में 180 से ज्यादा शहरों में 1,500 नए स्टोर्स ओपन करने का प्लान बना रही है।
अमेजन नाउ की 300 शहरों में विस्तार की योजना, रिलायंस जियोमार्ट भी रेस में शामिल
सिएटल बेस्ड ग्लोबल कंपनी अमेजन ने पिछले साल अपनी अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी सर्विस शुरू की थी। कंपनी अब अपनी ‘अमेजन नाउ’ सर्विस को 15 शहरों से बढ़ाकर 300 से अधिक शहरों और कस्बों तक ले जाने की घोषणा कर चुकी है। इसके लिए कंपनी भारत में अपने एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर 13 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम एडिशनल इन्वेस्टमेंट भी करने जा रही है।
इसके साथ ही मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल भी अपने जियोमार्ट प्लेटफॉर्म के जरिए क्विक कॉमर्स में तेजी से कदम बढ़ा रही है। रिलायंस के पास 1,200 से अधिक शहरों में फैले 3,100 से ज्यादा फिजिकल स्टोर्स का एक मजबूत नेटवर्क है। ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी रिसर्च के मुताबिक, हॉरिजॉन्टल ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के बीच यह कड़ी टक्कर कई सालों तक चलने वाली है।
आईपीओ से पहले जेप्टो के अनलिस्टेड शेयरों में 32 फीसदी की गिरावट
मार्केट में मचे इस घमासान के बीच जेप्टो अगले महीने 1 बिलियन डॉलर जुटाने के लिए अपना आईपीओ लाने की तैयारी में है। हालांकि, इस तगड़े प्राइस वॉर की वजह से अनलिस्टेड मार्केट में जेप्टो के शेयर 32 फीसदी से ज्यादा गिरकर 58 रुपए से 39 रुपए पर आ गए हैं। जेप्टो को सालाना 600 मिलियन डॉलर और स्विगी को 460 मिलियन डॉलर का नेट लॉस हो रहा है।
एमके (Emkay) ग्लोबल की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छी बात यह है कि क्विक कॉमर्स की डिमांड अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से फैल रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह पूरा सेक्टर अभी बाजार पर कब्जा करने की होड़ (लैंडग्रैब फेज) से गुजर रहा है, जहां भारी डिस्काउंट देकर मार्केट शेयर हासिल करने की जंग जारी रहेगी।

