Modi Cabinet Reshuffle: संसद के मानसून सत्र से पहले मोदी मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल, इन चेहरों को मिल सकती है जगह

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Delhi News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल हो सकता है। बीते दिनों पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद इस संभावना को और बल मिला है। माना जा रहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले सरकार अपनी नई टीम के साथ मैदान में उतर सकती है।

बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम की घोषणा

सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में बदलाव का यह फैसला बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में आने वाली नई संगठनात्मक टीम के साथ ही लिया जाएगा। पार्टी आलाकमान ने अपने पदाधिकारियों की सूची को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। इस बदलाव में संगठन के युवा और प्रभावशाली चेहरों को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाने की पूरी तैयारी है।

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रणनीतिक बदलाव के तहत, कुछ केंद्रीय राज्य मंत्रियों को पार्टी के संगठन में भेजा जा सकता है। वहीं, पार्टी के सक्रिय पदाधिकारियों को मोदी कैबिनेट में शामिल करके उन्हें सरकारी कामकाज में अनुभव देने का अवसर मिल सकता है। बीजेपी अध्यक्ष ने पिछले दिनों कई मंत्रियों के साथ चर्चा कर कामकाज का आकलन किया है, जिससे भविष्य की कार्ययोजना काफी स्पष्ट दिखाई दे रही है।

चुनावी राज्यों को मिलेगा मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व

अगले साल पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इन राज्यों के सांसदों को कैबिनेट में प्रमुखता मिलने की प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल में पार्टी की बढ़ती ताकत के कारण वहां के सांसदों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। शिंदे नीत शिवसेना और आम आदमी पार्टी से आए नेताओं को भी इस विस्तार में जगह मिल सकती है।

मंत्रियों के विभाग में बदलाव की अटकलें

फेरबदल की चर्चाओं के बीच कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव के कयास भी तेज हो गए हैं। विशेष रूप से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि नीट पेपर लीक और सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर मंत्रालय काफी आलोचनाओं के घेरे में है। सरकार की कोशिश जुलाई में ही इस प्रक्रिया को पूरी करने की है।

शिंदे गुट के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। हालांकि, टीएमसी और शिवसेना के बागी सांसदों के मामले में अभी थोड़ा इंतजार करना होगा, क्योंकि उनकी सदस्यता को लेकर लोकसभा स्पीकर का निर्णय आना बाकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव सरकार की आने वाली बड़ी चुनौतियों को देखते हुए काफी अहम साबित होगा।

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