देहरादून में मानसून की दस्तक के साथ नदियों के किनारे बसी बस्तियों पर मंडराया बाढ़ का बड़ा खतरा

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Dehradun News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मानसून आने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे बसे सैकड़ों परिवारों की मुश्किलें इस बार भी बढ़ने वाली हैं। हर साल भारी बारिश के दौरान इन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे बस्तियों में पानी भरने और जनहानि जैसी गंभीर घटनाएं सामने आती हैं।

नगर निगम ने मानसून से पहले नदियों की सफाई और मलबा हटाने का दावा किया है। मशीनों के जरिए जल निकासी को सुगम बनाया जा रहा है। हालांकि, नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में हुआ अतिक्रमण अब भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अतिक्रमण के कारण नदी का रास्ता संकरा हो गया है, जो मानसून में खतरनाक है।

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अतिक्रमण से बढ़ जाता है बाढ़ का खतरा

दून में करीब 129 ऐसी बस्तियां हैं, जहां हजारों लोग नदी किनारे या फ्लड प्लेन क्षेत्र में रहते हैं। कई मकान तो नदी की धारा तक पहुंच चुके हैं। फ्लड प्लेन नदी का वह विस्तार क्षेत्र होता है, जहां बारिश में अतिरिक्त पानी फैलता है। वहां निर्माण होने से पानी बस्तियों की ओर मुड़ जाता है, जो तबाही लाता है।

बीते वर्षों की मानसून तस्वीरों को देखें तो रिस्पना और बिंदाल के रौद्र रूप ने कई घर तबाह किए हैं। सड़कें बहने और दीवारों के ढहने से करोड़ों की संपत्ति को नुकसान हुआ है। लोगों को रातों-रात घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागना पड़ा है। इन संवेदनशील परिवारों को हटाना और उनका पुनर्वास करना आज भी प्रशासन के लिए बड़ा काम है।

अदालती आदेश और पुनर्वास की कठिन चुनौती

राष्ट्रीय हरित अधिकरण और उत्तराखंड हाई कोर्ट नदियों से अतिक्रमण हटाने और प्राकृतिक स्वरूप बहाल करने के सख्त निर्देश दे चुके हैं। अदालतों ने फ्लड प्लेन के सीमांकन पर जोर दिया है, लेकिन हजारों परिवारों के पुनर्वास की समस्या के कारण कार्रवाई धीमी है। मानसून में नगर निगम और प्रशासन के सामने सफाई और निगरानी बनाए रखने की दोहरी जिम्मेदारी है।

सहायक नगर आयुक्त विनय प्रताप का कहना है कि नदियों के किनारों से अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व में कई अभियान चलाए गए हैं। अवैध निर्माण ढहाने के साथ ही कब्जा करने वाले परिवारों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। नगर निगम नदी-नालों पर हो रहे कब्जे के खिलाफ लगातार सख्त रवैया अपना रहा है ताकि जनहानि को टाला जा सके।

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