Tehri Lake Floating Huts: टिहरी झील में बड़ा हादसा टला, जेटी टूटने से कंपनी की लापरवाही आई सामने

Tehri News: उत्तराखंड के प्रसिद्ध टिहरी झील में संचालित फ्लोटिंग हट्स एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। डोबरा-चांठी के पास स्थित इन हट्स की जेटी (Jetty) हाल ही में आए तूफान के दौरान टूट गई, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्थानीय लोगों और उत्तरायणी समिति ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनी ‘ली राय’ द्वारा इसकी नियमित मरम्मत नहीं की जा रही है। इस घटना ने पर्यटकों की सुरक्षा और सरकारी संपत्ति के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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लीज की शर्तों पर उठे गंभीर सवाल

वर्ष 2018 में निर्मित इन फ्लोटिंग हट्स के संचालन को लेकर सरकार की नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआत में इसके लिए सालाना साढ़े सात करोड़ रुपये की डिमांड रखी गई थी, लेकिन बाद में इसे मात्र डेढ़ करोड़ रुपये के सालाना टेंडर पर ली राय कंपनी को सौंप दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अमूमन 15-20 साल की लीज के बजाय, सरकार ने इस कंपनी को 30 वर्षों के लिए संपत्ति सौंप दी है, जिसमें 12 साल के विस्तार का भी प्रावधान है।

सीवर की गंदगी झील में डालने का आरोप

यह पहली बार नहीं है जब इन फ्लोटिंग हट्स का विरोध हो रहा है। नवंबर 2022 में स्थानीय निवासियों और उत्तरायणी समिति ने झील में सीवर की गंदगी डालने के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। इससे पहले अक्टूबर 2022 में एक कर्मचारी ने सीवर का पानी झील में बहाने का वीडियो वायरल किया था, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए किचन को सील कर दिया था। स्थानीय लोग लंबे समय से इसे बंद करने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

गंगा-भागीरथी बोट यूनियन के संयोजक कुलदीप पंवार का कहना है कि जेटी टूटने का मुख्य कारण कंपनी द्वारा इसकी नियमित रिपेयरिंग न कराना है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पर्यटन विकास अधिकारी सोबत सिंह राणा ने स्थलीय जांच की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक विशेषज्ञ टीम इस बात की जांच करेगी कि जेटी कैसे टूटी। यदि कंपनी की ओर से किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही पाई गई, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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