New Delhi News: नीति आयोग ने आयुर्वेद को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए भारत सरकार को एक अहम रिपोर्ट सौंपी है। इस स्ट्रेटेजिक रोडमैप में नया ग्लोबल आयुर्वेद रजिस्टर (जीएआर) बनाने की खास सलाह दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेडिशनल मेडिकल सिस्टम को इंटरनेशनल मार्केट में मजबूत पहचान दिलाना है।
आयुर्वेद और योग के लिए ग्लोबल फेडरेशन बनाने का प्रपोजल
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आयुर्वेद और योग के लिए एक बड़ा वर्ल्ड फेडरेशन बनाने का प्रपोजल रखा है। सरकार को आयुर्वेदिक मेडिसिन के एक्सपोर्ट के लिए स्पेशल स्टैण्डर्ड तय करना चाहिए। ऐसा करने से भारतीय मेडिसिन का ग्लोबल ट्रस्ट बढ़ेगा और विदेशी मार्केट में हमारी बहुत मजबूत पकड़ बनेगी।
ट्रेड पर पैनी नजर रखने के लिए एक रियल-टाइम आयुर्वेद ट्रेड डैशबोर्ड बनाने की भी सिफारिश की गई है। इस नए सिस्टम से ग्लोबल ट्रेड का सही डेटा आसानी से मिल सकेगा। नीति आयोग ने आयुर्वेद की तेज ग्रोथ के लिए इंडस्ट्री और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर फोकस किया है।
देश में काम करते हैं 95 प्रतिशत आयुर्वेद प्रोफेशनल्स
भारत में आयुर्वेद एक मान्यता प्राप्त और अच्छी तरह से कंट्रोल्ड मेडिकल सिस्टम माना जाता है। देश के अंदर तीन लाख पचपन हजार से ज्यादा ट्रेंड आयुर्वेद डॉक्टर मौजूद हैं। दुनिया भर के कुल क्वालिफाइड आयुर्वेद प्रोफेशनल्स में से 95 प्रतिशत केवल भारत में काम कर रहे हैं। बाहर यह संख्या काफी कम है।
भारतीय आयुर्वेद प्रोडक्ट्स आज दुनिया के लगभग 150 देशों में लगातार एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं। साल 2014 में इनका एक्सपोर्ट 1.09 बिलियन डॉलर था। साल 2023 में यह डेटा बढ़कर 2.16 बिलियन डॉलर पहुंच गया। आयुर्वेद के ग्लोबल होने से हेल्थ प्रोडक्ट्स मार्केट, वेलनेस सेक्टर और मेडिकल टूरिज्म में भारी ग्रोथ होगी।

