जज के पद पर रहते हुए 16 साल तक गैस एजेंसी चलाते रहे जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल, BPCL ने लाइसेंस किया सस्पेंड

Delhi News: संवैधानिक पदों पर आसीन जजों के लिए तय नैतिक नियमों और आचार संहिता के उल्लंघन का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज और मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल अपने 16 साल के कार्यकाल में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी भी चलाते रहे।

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इस पूरे मामले का भंडाफोड़ भारत पेट्रोलियम (BPCL) की एक डीलरशिप से जुड़े विवाद और उनके पूर्व मैनेजर की पत्नी द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका से हुआ है। नियम के मुताबिक, जजों का सरकार, निजी पार्टियों या कंपनियों के साथ कोई आर्थिक, कॉन्ट्रैक्ट या व्यावसायिक संबंध नहीं होना चाहिए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बीपीसीएल ने साल 1984 में सिद्धार्थ मृदुल को ‘किचन फ्लेम’ नाम से एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की थी। हितों के टकराव से बचने के नियमों के बावजूद, जस्टिस मृदुल 21 नवंबर 2024 को मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने तक इस एजेंसी के मालिक बने रहे।

न्यायिक पदों पर रहते हुए कई बार रिन्यू कराया बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट

जस्टिस मृदुल मार्च 2008 में दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुए थे और अक्टूबर 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। हैरान करने वाली बात यह है कि इतने अहम पदों पर रहते हुए भी उन्होंने गैस एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट को कई बार रिन्यू कराया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

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यह एग्रीमेंट 1995, 2005, 2010, 2015, 2025 और पिछले साल 29 सितंबर को 2030 तक की वैधता के साथ रिन्यू किया गया। बीपीसीएल के साथ हुए सबसे नए एग्रीमेंट के स्टाम्प पेपर पर जस्टिस मृदुल की तस्वीर लगी है और ‘किचन फ्लेम’ के लिए उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

पूर्व मैनेजर की विधवा की याचिका से हाईकोर्ट में खुला बड़ा राज

इस खामोश कारोबार का खुलासा तब हुआ जब ‘किचन फ्लेम’ के पूर्व मैनेजर दीपक यादव की विधवा मोनिका यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। मोनिका ने अदालत से गुहार लगाई थी कि बीपीसीएल को एजेंसी का मालिकाना हक उनके नाम पर ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाए।

इसी बीच, दिसंबर 2025 में जस्टिस मृदुल के खिलाफ एक जनशिकायत दर्ज हुई, जिसके बाद बीपीसीएल ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजे। तेल कंपनी ने कहा कि बिना लिखित अनुमति के न्यायिक पद पर रहते हुए एजेंसी चलाना नियमों का उल्लंघन है। नोटिस का जवाब न मिलने पर बीपीसीएल ने 6 जुलाई को लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

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