वाराणसी के आईआईटी बीएचयू परिसर स्थित सरोवर का हुआ नामकरण, महान वैज्ञानिक आचार्य अनंतरामन को दी गई श्रद्धांजलि

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Varanasi News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बीएचयू ने अपने परिसर में स्थित ऐतिहासिक सरोवर का नामकरण ‘अनंत सरोवर’ किया है। इस विशेष समारोह में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने शिरकत की। ख्यात धातु विज्ञानी प्रो. श्रीकांत लेले ने मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होकर कहा कि यह कदम संस्थान की गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अनूठी पहल है।

यह सरोवर न केवल वैज्ञानिक शोध का केंद्र रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का बड़ा प्रतीक भी है। छठ पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों पर यहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटते हैं। संस्थान की यह पहल अपनी महान विभूतियों के सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की प्रतिबद्धता को पूरी तरह दर्शाती है।

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आचार्य अनंतरामन का रहा अद्भुत योगदान

संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि ‘अनंत सरोवर’ का नामकरण करना केवल एक औपचारिक रस्म नहीं है। यह आचार्य टीआर. अनंतरामन की दूरदर्शिता और उत्कृष्ट कार्यों को नमन करने का तरीका है। प्रो. अनंतरामन ने अपनी मेहनत से संस्थान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनका यह स्थायी स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

प्रो. एनके. मुखोपाध्याय ने बताया कि आचार्य अनंतरामन देश के जाने-माने धातु विज्ञानी थे। उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से भी नवाजा गया था। वे वर्ष 1981 से 1986 तक संस्थान के निदेशक रहे। उनके कार्यकाल में ही इस सरोवर का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया था। उन्होंने 1962 से 1977 तक धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख के रूप में भी सेवा दी थी।

समारोह में दिग्गजों की रही उपस्थिति

इस गरिमापूर्ण समारोह में संस्थान के अनेक पूर्व निदेशक और वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने शिलापट्ट का अनावरण कर विधिवत रूप से नामकरण की घोषणा की। समारोह का सफल संचालन शशांक पाठक ने किया, जबकि अंत में प्रो. राजेश कुमार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन संस्थान की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक माध्यम बना।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न संकायों के अध्यक्षों की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। कुलसचिव सुमित कुमार बिस्वास, चीफ प्रॉक्टर प्रो. संजय सिंह और बड़ी संख्या में शोधार्थी मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में आचार्य अनंतरामन के महान योगदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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