Himachal News: राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश की चरमराती स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा है। सांसद और भाजपा नेता डॉ. सिकंदर कुमार ने अस्पतालों की बदहाली पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से ट्रॉमा सेंटर और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा जवाब मांगा है। इसके अलावा उन्होंने 3000 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पर भी जानकारी मांगी। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने जो आंकड़े पेश किए, वे हैरान करने वाले हैं।
ट्रॉमा सेंटर के नाम पर सिर्फ 4 लाख का प्रावधान?
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संसद में चौंकाने वाले आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार ने ट्रॉमा सेंटरों के लिए चालू वित्त वर्ष में मात्र 4 लाख रुपये रखे हैं। यह एक बहुत ही मामूली और सांकेतिक रकम है। हालांकि, सिविल निर्माण कार्यों के लिए 156.57 करोड़ रुपये का बजट जरूर रखा गया है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार साल 2026-27 में जिला अस्पतालों के भीतर आपातकालीन सेवाओं को 50 फीसदी तक बढ़ाने जा रही है।
पीएम-एबीएचआईएम योजना से मिले 184 करोड़
केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए जारी फंड की पूरी जानकारी दी। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत हिमाचल को 184.64 करोड़ रुपये मिले हैं। यह भारी भरकम पैसा साल 2021-22 से 2025-26 के बीच जारी हुआ है। इस राशि का इस्तेमाल अस्पतालों में गंभीर मरीजों की देखभाल और नई जांच मशीनें लगाने में किया जा रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज को सौगात
डॉ. सिकंदर कुमार ने हिमाचल में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ‘निमहंस-2’ खोलने की पुरजोर मांग उठाई। इस पर केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि उत्तर भारत में अभी कोई राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं है। लेकिन, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 25 उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इसी योजना के तहत टांडा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज को 31.45 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। इसमें से 28.30 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए गए हैं।

