हरियाणा में किसानों और नागरिकों को बड़ी राहत, सरकार ने समय पर काम पूरा करने के लिए तय की समय-सीमा

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Haryana News: हरियाणा सरकार ने किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मार्केटिंग बोर्ड) की 10 महत्वपूर्ण सेवाओं को ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ (राइट टू सर्विस एक्ट) के दायरे में शामिल कर अधिसूचित कर दिया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, अब सरकारी कामों में होने वाली देरी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। इन सभी 10 सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी (टाइम बाउंड डिलीवरी) को सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकारियों और शिकायत निवारण प्राधिकारियों की भी नियुक्ति कर दी गई है।

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फसल बेचने के अगले ही दिन किसानों को मिलेगा जे-फॉर्म

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब किसानों को अनाज मंडियों में अपनी फसल बेचने के मात्र एक दिन के अंदर ‘जे-फॉर्म’ (J-Form) दे दिया जाएगा। इससे किसानों को अपनी फसल की बिक्री का पूरा विवरण तुरंत मिल सकेगा और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

इसके अलावा, यदि खेती या कृषि कार्यों के दौरान किसी हादसे या चोट के कारण किसी किसान की असामयिक मौत हो जाती है, तो विसरा रिपोर्ट (Visera Report) मिलने के ठीक एक महीने के भीतर उनके आश्रितों को अनुग्रह राशि (मुआवजा) अनिवार्य रूप से जारी कर दी जाएगी।

शौचालय में गंदगी की शिकायत पर दो दिन में होगा एक्शन

आम जनता की सुविधा के लिए भी इस अधिसूचना में कड़े नियम बनाए गए हैं। अगर किसी सार्वजनिक शौचालय में साफ-सफाई ठीक नहीं है, तो इसकी शिकायत मिलने के महज दो दिन के अंदर सफाई व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करना होगा। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

इसके साथ ही, जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों को भी इस एक्ट के तहत समय-सीमा में बांधा गया है। ट्रांसफर डीड जारी करने, एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र), अलॉटमेंट कॉपी (आवंटन प्रतिलिपि), री-अलॉटमेंट लेटर और बिक्री के मामलों में संपत्ति का री-ट्रांसफर जैसे सभी काम अब अधिकतम 30 दिन में पूरे किए जाएंगे।

प्रॉपर्टी ट्रांसफर और एनओसी के लिए समय-सीमा निर्धारित

अधिसूचना के मुताबिक, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (बेबाकी प्रमाणपत्र) और मॉर्टगेज (गिरवी रखने) के लिए जरूरी एनओसी अब संबंधित विभाग को हर हाल में 15 दिन के भीतर जारी करनी होगी। अधिकारियों को इस तय समय-सीमा के अंदर ही आवेदनों का निपटारा करना होगा।

वहीं, बिक्री के मामलों में संपत्ति के पुन: अंतरण (अविवादित मृत्यु के मामलों में प्रॉपर्टी ट्रांसफर) की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिकतम 60 दिन का समय तय किया गया है। सरकार की इस पहल से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

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