New Delhi News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने फाइनेंशियल ईयर दो हजार छब्बीस-सत्तााइस (FY27) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान बढ़ाकर छह पॉइंट पांच प्रतिशत कर दिया है।
इससे पहले बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर छह पॉइंट एक प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। बैंक की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया में सिचुएशन नॉर्मल होने और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारत की डोमेस्टिक इकोनॉमी को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
अमेरिका-ईरान समझौते से वैश्विक तेल बाजार का दबाव हुआ कम
गोल्डमैन सैक्स की इस खास रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई का प्रेशर काफी कम हुआ है। पहले इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में क्रूड ऑयल की सप्लाई रुकने का खतरा था, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें बढ़ गई थीं।
भारत अपनी एनर्जी नीड्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इम्पोर्ट करता है। देश का साठ प्रतिशत से ज्यादा एनर्जी इम्पोर्ट अकेले हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से ही होता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह हालिया गिरावट भारतीय बाजार और सरकार के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
खुदरा महंगाई का अनुमान घटकर हुआ 4.9 प्रतिशत, खाद सब्सिडी का खर्च भी बचेगा
इस पॉजिटिव बदलाव के चलते गोल्डमैन सैक्स ने भारत में रिटेल इन्फ्लेशन यानी खुदरा महंगाई का अनुमान भी पांच पॉइंट एक प्रतिशत से घटाकर चार पॉइंट नौ प्रतिशत कर दिया है। कच्चे तेल और यूरिया जैसी जरूरी कमोडिटीज के दाम घटने से देश में महंगाई का दबाव आने वाले दिनों में काफी कम होगा।
ग्लोबल मार्केट में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट से भारत सरकार का खाद सब्सिडी पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो सकता है। इससे सरकार के फाइनेंशियल प्रेशर में कमी आएगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएमडी द्वारा जताई गई हीटवेव की आशंका रूरल एरिया में खपत को थोड़ा प्रभावित कर सकती है।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दो हजार छब्बीस में दो फेज में कुल पचास बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, अगर इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल की कीमतें लगातार घटती रहीं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने का अपना यह फैसला कुछ समय के लिए टाल भी सकता है।

