Mumbai News: भारतीय शेयर बाजार में अगर सही कंपनी में धैर्य के साथ पैसा लगाया जाए, तो भारी मुनाफा कमाना नामुमकिन नहीं है। हाल के वर्षों में डिफेंस सेक्टर की कंपनियों ने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया है। इन्हीं कंपनियों में से एक चमकता हुआ नाम ‘कृष्णा डिफेंस एंड अलाइड इंडस्ट्रीज’ है।
इस कंपनी ने अपने निवेशकों को जबरदस्त कमाई कराई है। बीते कुछ ही सालों में इस कंपनी का शेयर महज छप्पन रुपये से उड़ान भरकर एक हजार तीन सौ बयालीस रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य के बड़े प्लान के चलते यह कंपनी निवेशकों के रडार पर है।
दो साल में दिया करीब तेईस सौ फीसदी का बंपर रिटर्न
शेयर बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस स्टॉक की रफ्तार हैरान करने वाली है। पंद्रह जुलाई दो हजार बाईस को इस शेयर का भाव मात्र छप्पन रुपये के आसपास था। वहीं, पच्चीस जून दो हजार छब्बीस को यह शेयर एक हजार तीन सौ इकतालीस रुपये सत्तर पैसे के स्तर पर पहुंच गया।
इस छोटी सी अवधि में शेयर ने करीब 2296.43 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है। यानी जिस निवेशक ने सही समय पर एक लाख रुपये का दांव खेला, उसकी रकम आज बढ़कर 23.96 लाख रुपये हो चुकी है। पिछले एक साल में भी इस शेयर ने करीब तिरालीस फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है।
कृष्णा डिफेंस मुख्य रूप से भारतीय सेना और नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण डिफेंस उपकरण और सिस्टम बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में रक्षा उत्पादों के साथ-साथ नौसेना सिस्टम, बख्तरबंद गाड़ियों के पार्ट्स शामिल हैं। इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स गुजरात के हलोल और कलोल में स्थित हैं।
नेवल ग्रेड प्रोजेक्ट से कंपनी को मिली नई उड़ान
वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस-छब्बीस कंपनी के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हुआ है। इस दौरान कंपनी ने भारत का सबसे बड़ा ‘नेवल ग्रेड ऑटोनोमस अंडरवाUnderwater व्हीकल’ बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए कंपनी ने सीएसआईआर-एनआईओ गोवा से एक खास और आधुनिक तकनीक हासिल की है।
इस तकनीक से पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाले रक्षा तंत्र में कंपनी की पकड़ मजबूत हुई है। साथ ही, इसे ब्यूरो वेरिटास का सर्टिफिकेशन भी मिला है। यह सर्टिफिकेशन कमर्शियल शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में कंपनी के लिए आने वाले समय में कमाई के कई नए रास्ते खोल सकता है।
मजबूत ऑर्डर बुक से वित्तीय सेहत हुई दमदार
कंपनी की बैलेंस शीट और तिमाही नतीजे भी इसकी सफलता की गवाही दे रहे हैं। इकतीस मार्च दो हजार छब्बीस तक कंपनी के पास 103.4 करोड़ रुपये के पक्के ऑर्डर थे। इसके साथ ही करीब दो सौ इक्कीस करोड़ रुपये के बड़े टेंडर अभी पाइपलाइन में हैं।
वित्त वर्ष दो हजार छब्बीस की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के छियालीस करोड़ रुपये से बढ़कर पैंसठ करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट भी सात करोड़ रुपये से दोगुना होकर चौदह करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कंपनी पर कर्ज न के बराबर है।

